
नवरात्रि के सातवें दिन यानी सप्तमी तिथि पर मां कालरात्रि की आराधना की जाती है। देवी दुर्गा का यह स्वरूप सबसे उग्र और शक्तिशाली माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मां कालरात्रि अपने भक्तों के जीवन से भय, नकारात्मकता और शत्रुओं का नाश कर उन्हें साहस और सुरक्षा का वरदान देती हैं।
मां कालरात्रि का स्वरूप और महत्व
मां कालरात्रि का रूप अत्यंत भयंकर और प्रभावशाली बताया गया है। उनका वर्ण काला है और वे चार भुजाओं वाली हैं। देवी गधे की सवारी करती हैं, जो उनके अद्वितीय और रहस्यमय स्वरूप को दर्शाता है। उनके इस रूप को देखने मात्र से ही बुरी शक्तियां दूर भाग जाती हैं।
धार्मिक ग्रंथों में उल्लेख मिलता है कि मां कालरात्रि का स्मरण करने से सभी प्रकार के भय समाप्त हो जाते हैं और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। इसी कारण उन्हें ‘शुभंकारी’ भी कहा जाता है।
बुरी शक्तियों का नाश करती हैं मां
माना जाता है कि मां कालरात्रि विशेष रूप से नकारात्मक शक्तियों, तांत्रिक बाधाओं और शत्रुओं का नाश करती हैं। जो भक्त सच्चे मन से उनकी पूजा करता है, उसे किसी भी प्रकार का भय नहीं सताता। उनके आशीर्वाद से व्यक्ति जीवन की कठिन परिस्थितियों का सामना निडर होकर कर पाता है।
भक्तों को देती हैं सुख-समृद्धि और निर्भयता
नवरात्रि के इस दिन मां कालरात्रि की पूजा करने से घर में सुख-समृद्धि का वास होता है। साथ ही व्यक्ति के मन से डर समाप्त होकर आत्मविश्वास बढ़ता है। मान्यता है कि उनकी कृपा से जीवन में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं और सफलता के मार्ग खुलते हैं।
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