
वॉशिंगटन: दुनिया की निगाहें आज अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी NASA के बहुप्रतीक्षित Artemis-II मिशन पर टिकी हैं। 54 साल के लंबे अंतराल के बाद इंसान एक बार फिर चंद्रमा की कक्षा तक पहुंचने जा रहा है। यह ऐतिहासिक मिशन न केवल अंतरिक्ष विज्ञान में नई दिशा तय करेगा, बल्कि भविष्य में मंगल ग्रह तक मानव मिशन का रास्ता भी खोलेगा।
चांद की ओर ऐतिहासिक उड़ान, 4 एस्ट्रोनॉट्स का दल तैयार
फ्लोरिडा से आज लॉन्च होने वाले इस मिशन में चार अंतरिक्ष यात्री शामिल हैं—Reid Wiseman, Victor Glover, Christina Koch और Jeremy Hansen। यह टीम करीब 10 दिन तक अंतरिक्ष में रहकर चंद्रमा का चक्कर लगाएगी, हालांकि यह मिशन चांद पर लैंडिंग नहीं करेगा।
यह मिशन काफी हद तक 1968 के ऐतिहासिक Apollo 8 mission जैसा होगा, जब इंसानों ने पहली बार चंद्रमा की परिक्रमा की थी।
4.5 लाख किलोमीटर दूर जाएंगे अंतरिक्ष यात्री
Artemis-II मिशन के दौरान अंतरिक्ष यात्री पृथ्वी से लगभग 4,50,000 किलोमीटर दूर तक जाएंगे। यह दूरी मानव अंतरिक्ष उड़ान के इतिहास में अब तक की सबसे ज्यादा दूरी होगी। इससे पहले का रिकॉर्ड अपोलो युग में बना था, जिसे अब तोड़ा जाएगा।
क्यों खास है Artemis-II मिशन
यह मिशन इसलिए बेहद अहम माना जा रहा है क्योंकि अपोलो कार्यक्रम के बाद पहली बार अंतरिक्ष यात्री पृथ्वी की निचली कक्षा से बाहर निकलकर गहरे अंतरिक्ष में जाएंगे। यह एक टेस्ट फ्लाइट है, जिसका उद्देश्य भविष्य के चंद्रमा लैंडिंग और मंगल मिशनों के लिए नई तकनीकों को परखना है।
इस मिशन में इस्तेमाल हो रहा Space Launch System (SLS) रॉकेट और उन्नत स्पेसक्राफ्ट भविष्य के बड़े अभियानों की नींव रखेंगे।
अंतरिक्ष अन्वेषण से लेकर प्रेरणा तक
NASA का मानना है कि यह मिशन केवल वैज्ञानिक उपलब्धि नहीं है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करने वाला भी है। चंद्रमा, सौर मंडल के निर्माण का अहम गवाह माना जाता है और मंगल ग्रह तक पहुंचने के लिए एक महत्वपूर्ण पड़ाव भी है।
देरी के बाद आखिरकार लॉन्च का दिन
Artemis-II मिशन पहले फरवरी में लॉन्च होना था, लेकिन तकनीकी खामियों और परीक्षणों के कारण इसमें देरी हुई। यहां तक कि रॉकेट को दोबारा हैंगर में ले जाकर जांच और मरम्मत भी करनी पड़ी। यदि आज लॉन्च नहीं हो पाता है तो 6 अप्रैल तक अन्य लॉन्च विंडो उपलब्ध हैं।
Artemis प्रोग्राम का बड़ा लक्ष्य
Artemis प्रोग्राम का अंतिम लक्ष्य 2028 तक चंद्रमा पर इंसानों की वापसी सुनिश्चित करना है। इसके साथ ही चंद्रमा पर एक स्थायी बेस स्थापित करने की योजना है, जो भविष्य में मंगल ग्रह के मिशनों के लिए लॉन्चपैड का काम करेगा। हालांकि, इस कार्यक्रम की लागत और समयसीमा को लेकर विशेषज्ञों ने सवाल भी उठाए हैं।
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