
17 मई 2026 से हिंदू पंचांग का विशेष और पवित्र महीना अधिक मास शुरू होने जा रहा है, जिसे पुरुषोत्तम मास या मलमास के नाम से भी जाना जाता है। यह महीना धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि इस दौरान शुभ कार्यों पर रोक रहती है और भगवान विष्णु की आराधना का विशेष विधान बताया गया है। इस बार का अधिक मास इसलिए भी खास है क्योंकि लगभग 27 वर्षों बाद ज्येष्ठ मास के साथ इसका अद्भुत संयोग बन रहा है, जिससे यह महीना 60 दिनों का हो जाएगा और साल 12 नहीं बल्कि 13 महीनों का माना जाएगा।
🪔 अधिक मास 2026 कब से कब तक रहेगा
इस वर्ष अधिक मास 17 मई 2026 से शुरू होकर 15 जून 2026 तक चलेगा। चूंकि यह ज्येष्ठ मास के साथ जुड़ रहा है, इसलिए इस बार ज्येष्ठ मास सामान्य 30 दिनों के बजाय 60 दिनों का होगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यह समय भगवान विष्णु को समर्पित होता है और इसे साधना, भक्ति और आत्मशुद्धि का सर्वोत्तम अवसर माना जाता है।
🙏 अधिक मास में क्या करें (Do’s)
अधिक मास के दौरान भगवान विष्णु की आराधना करना अत्यंत शुभ माना गया है। इस दौरान प्रतिदिन “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जप करना चाहिए जिससे मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है। इसके अलावा विष्णु सहस्त्रनाम और विष्णु चालीसा का पाठ करना भी अत्यंत फलदायी माना गया है। इस महीने में दान-पुण्य का विशेष महत्व है, जिसमें वस्त्र, फल, सब्जियां, जल से भरे घड़े और कांसे के बर्तन का दान करना श्रेष्ठ बताया गया है। श्रद्धालु चाहें तो मालपुए का दान भी कर सकते हैं। पवित्र नदियों में स्नान करना अत्यंत पुण्यकारी माना गया है, और यदि यह संभव न हो तो घर पर ही गंगाजल मिलाकर स्नान किया जा सकता है। इस दौरान श्रीमद्भागवत गीता या कथा का पाठ करने से मन को शांति और आध्यात्मिक ऊर्जा प्राप्त होती है।
🚫 अधिक मास में क्या न करें (Don’ts)
इस पवित्र महीने में किसी भी प्रकार के शुभ कार्य जैसे विवाह, सगाई, गृह प्रवेश, मुंडन या नए कार्य की शुरुआत करने से बचना चाहिए। तामसिक भोजन जैसे लहसुन और प्याज का सेवन वर्जित माना गया है। इसके अलावा झूठ बोलना, किसी का अपमान करना या किसी के प्रति कटु व्यवहार करना भी इस महीने में अशुभ माना जाता है क्योंकि इससे पुण्य फल नष्ट हो सकते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दौरान मन, वचन और कर्म की शुद्धता बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है।
📿 अधिक मास क्यों लगता है (वैज्ञानिक और धार्मिक कारण)
हिंदू पंचांग चंद्र गणना पर आधारित होता है, जिसमें एक वर्ष लगभग 354 दिनों का होता है, जबकि सौर वर्ष लगभग 365 दिनों का होता है। दोनों के बीच लगभग 11 दिनों का अंतर हर वर्ष बढ़ता जाता है और करीब 32 महीने 16 दिन में यह अंतर लगभग एक महीने के बराबर हो जाता है। इस अंतर को संतुलित करने के लिए हर कुछ वर्षों में एक अतिरिक्त महीना जोड़ा जाता है, जिसे अधिक मास, मलमास या पुरुषोत्तम मास कहा जाता है। यही कारण है कि यह महीना धार्मिक और खगोलीय दोनों दृष्टियों से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।
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