RSS के 100वें वर्ष पर वैश्विक विस्तार की बड़ी तैयारी, मोहन भागवत करेंगे अमेरिका-ब्रिटेन दौरा; प्रवासी भारतीयों से करेंगे सीधा संवाद

नई दिल्ली। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) अपने शताब्दी वर्ष को वैश्विक स्तर पर विशेष रूप से मनाने की तैयारी में जुटा हुआ है। इसी कड़ी में संघ प्रमुख मोहन भागवत अगले दो महीनों के भीतर अमेरिका और ब्रिटेन के महत्वपूर्ण दौरे पर जा सकते हैं। प्रस्तावित यात्रा को RSS के अंतरराष्ट्रीय विस्तार, भारतीय मूल के लोगों से जुड़ाव और वैश्विक स्तर पर संगठनात्मक पहुंच मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

प्रवासी भारतीयों और सामाजिक संगठनों से होगा संवाद

सूत्रों के अनुसार, मोहन भागवत अमेरिका और ब्रिटेन में आयोजित विभिन्न सामाजिक, सांस्कृतिक और सामुदायिक कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगे। इस दौरान उनका फोकस विशेष रूप से प्रवासी भारतीय समुदाय के साथ संवाद स्थापित करने और भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों को लेकर चर्चा करने पर रहेगा। दोनों देशों में बड़ी संख्या में भारतीय मूल के लोग रहते हैं, जिनके बीच RSS से जुड़े विचारों और गतिविधियों को लेकर लगातार रुचि बढ़ रही है।

शताब्दी वर्ष के उत्सव का हिस्सा होगा दौरा

संघ अपने स्थापना के 100 वर्ष पूरे होने के अवसर पर देश और विदेश में कई विशेष कार्यक्रम आयोजित कर रहा है। मोहन भागवत का यह विदेश दौरा भी इसी व्यापक अभियान का हिस्सा माना जा रहा है। संगठन की ओर से विभिन्न देशों में भारतीय समुदाय और सामाजिक संस्थाओं के सहयोग से कार्यक्रमों की रूपरेखा तैयार की जा रही है।

हिंदू स्वयंसेवक संघ की भी रहेगी अहम भूमिका

जानकारी के मुताबिक, अमेरिका और ब्रिटेन में होने वाले कुछ कार्यक्रमों का आयोजन हिंदू स्वयंसेवक संघ (HSS) की ओर से किया जा सकता है। HSS को RSS के अंतरराष्ट्रीय विस्तार के रूप में देखा जाता है और यह कई देशों में भारतीय संस्कृति, सेवा कार्यों तथा सामाजिक गतिविधियों से जुड़े कार्यक्रम संचालित करता है।

अंतिम चरण में पहुंचीं तैयारियां

रिपोर्ट्स के अनुसार, प्रस्तावित यात्रा की तैयारियां अंतिम चरण में हैं और कार्यक्रमों की रूपरेखा को अंतिम रूप दिया जा रहा है। हालांकि आधिकारिक कार्यक्रमों की विस्तृत सूची अभी सार्वजनिक नहीं की गई है, लेकिन माना जा रहा है कि दोनों देशों में मोहन भागवत कई महत्वपूर्ण सभाओं और संवाद कार्यक्रमों को संबोधित करेंगे।

RSS के शताब्दी वर्ष के अवसर पर होने वाला यह दौरा संगठन की वैश्विक उपस्थिति को और मजबूत करने के साथ-साथ दुनिया भर में बसे भारतीय समुदाय के साथ रिश्तों को नई दिशा देने वाला माना जा रहा है।

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