शिलांग/नई दिल्ली। मेघालय के पूर्वी जयंतिया हिल्स जिले से एक दिल दहला देने वाली खबर सामने आई है। गुरुवार सुबह थांगस्कू इलाके में स्थित एक संदिग्ध अवैध कोयला खदान में जोरदार विस्फोट होने से कम से कम 16 मजदूरों की मौत हो गई। इस भीषण हादसे में कई अन्य लोगों के मलबे में दबे होने की आशंका है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस घटना पर गहरा शोक व्यक्त किया है और पीड़ितों के लिए आर्थिक सहायता की घोषणा की है।
प्रधानमंत्री ने जताया शोक, आर्थिक मदद की घोषणा
हादसे की जानकारी मिलते ही प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पीएम मोदी की ओर से शोक संवेदनाएं व्यक्त कीं।
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मृतकों के लिए सहायता: प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष (PMNRF) से प्रत्येक मृतक के परिजनों को 2 लाख रुपये की अनुग्रह राशि दी जाएगी।
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घायलों के लिए मदद: घटना में घायल हुए लोगों को 50,000 रुपये की आर्थिक मदद प्रदान की जाएगी।
प्रधानमंत्री ने घायलों के जल्द स्वस्थ होने की कामना करते हुए कहा कि वह इस दुर्घटना से अत्यंत व्यथित हैं।
धमाके की वजह: डायनामाइट फटने की आशंका
पुलिस और स्थानीय प्रशासन के अनुसार, यह हादसा पूर्वी जयंतिया हिल्स के थांगस्कू इलाके में हुआ। शुरुआती जांच में संकेत मिले हैं कि खदान के भीतर इस्तेमाल किए जाने वाले डायनामाइट के फटने की वजह से यह भीषण धमाका हुआ। हालांकि, पुलिस ने अभी तक विस्फोट के सटीक कारणों पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है।
रेस्क्यू ऑपरेशन जारी: मलबे में फंसे हो सकते हैं और लोग
मेघालय के पुलिस महानिदेशक (DGP) ने 16 मौतों की पुष्टि करते हुए बताया कि राहत और बचाव कार्य युद्ध स्तर पर जारी है।
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एसपी विकास कुमार का बयान: पूर्वी जयंतिया हिल्स के एसपी ने बताया कि अब तक कई शव बरामद किए जा चुके हैं।
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गंभीर रूप से घायल: एक मजदूर धमाके में 70% तक झुलस गया है, जिसे नाजुक हालत में इलाज के लिए शिलांग रेफर किया गया है।
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संदेह: अभी यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि खदान के अंदर कुल कितने लोग काम कर रहे थे, इसलिए आशंका जताई जा रही है कि मृतकों का आंकड़ा बढ़ सकता है।
अवैध खनन पर फिर उठे सवाल
मेघालय में कोयला खदानों में होने वाले हादसे पहले भी सुर्खियां बटोरते रहे हैं। इस घटना ने एक बार फिर इलाके में चल रहे अवैध कोयला खनन (Rat-Hole Mining) और मजदूरों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रशासन अब इस बात की जांच कर रहा है कि प्रतिबंध के बावजूद यह खदान कैसे संचालित की जा रही थी।
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