असम कांग्रेस में ‘महाभारत’: क्या गौरव गोगोई की एंट्री ने बिगाड़ा खेल? भूपेन बोरा के इस्तीफे की वो इनसाइड स्टोरी जो आपको जाननी चाहिए

गुवाहाटी/नई दिल्ली: असम विधानसभा चुनाव की दहलीज पर खड़ी कांग्रेस के लिए बुरी खबर सामने आई है। राज्य में बीजेपी के ‘विजय रथ’ को रोकने की रणनीति बना रही पार्टी खुद अपनों के ही चक्रव्यूह में फंस गई है। असम कांग्रेस के कद्दावर नेता और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष भूपेन बोरा ने अपने पद से इस्तीफा देकर दिल्ली से लेकर गुवाहाटी तक खलबली मचा दी है। हालांकि, आलाकमान उन्हें मनाने में जुटा है, लेकिन सूत्रों का कहना है कि इस बार बोरा ‘आर-पार’ के मूड में हैं।

धार्मिक परंपरा का उल्लंघन और स्वाभिमान की लड़ाई

भूपेन बोरा के इस्तीफे के पीछे सिर्फ राजनीतिक कारण नहीं, बल्कि गहरी सांस्कृतिक और धार्मिक नाराजगी भी बताई जा रही है। सूत्रों के मुताबिक, हाल ही में माजुली के एक पवित्र धार्मिक स्थल पर सांसद गौरव गोगोई की एक गतिविधि ने आग में घी डालने का काम किया। आरोप है कि गोगोई वहां परंपरा के विपरीत एक गैर-हिंदू नेता को साथ ले गए, जिससे स्थानीय स्तर पर नाराजगी फैली। असम की संस्कृति के गहरे जानकार माने जाने वाले भूपेन बोरा इस घटना से बेहद आहत थे और उन्होंने इसे अपनी उपेक्षा और परंपराओं के अपमान के तौर पर देखा।

गौरव गोगोई को मिली ताकत, हाशिए पर आए बोरा?

कांग्रेस आलाकमान ने पिछले साल पूर्व मुख्यमंत्री तरुण गोगोई के बेटे गौरव गोगोई को प्रदेश की कमान सौंपकर युवा नेतृत्व पर दांव खेला था। इसके साथ ही प्रियंका गांधी को स्क्रीनिंग कमेटी का प्रमुख और डीके शिवकुमार जैसे दिग्गजों को पर्यवेक्षक बनाकर बड़ी घेराबंदी की गई थी। लेकिन इस चमक-धमक के बीच भूपेन बोरा को लगा कि उनकी चार साल की मेहनत को नजरअंदाज किया जा रहा है। बेहाली विधानसभा उपचुनाव में टिकट बंटवारे से शुरू हुई यह खींचतान अब इस्तीफे तक पहुंच गई है। बोरा के करीबियों का कहना है कि भले ही उन्हें गठबंधन कमेटी का जिम्मा दिया गया, लेकिन असली पावर गौरव गोगोई के पास ही सिमट कर रह गई थी।

राहुल गांधी का फोन और जितेंद्र सिंह की ‘मान-मनौव्वल’

जैसे ही बोरा के इस्तीफे की खबर फैली, कांग्रेस के संकटमोचक एक्टिव हो गए। खुद राहुल गांधी ने भूपेन बोरा को फोन कर बात की, वहीं असम प्रभारी जितेंद्र सिंह आनन-फानन में उनके घर पहुंचे। हालांकि, बैठक के बाद दावा किया गया कि बोरा मान गए हैं, लेकिन खुद भूपेन बोरा ने स्पष्ट कर दिया है कि उन्हें अंतिम फैसले के लिए एक दिन का समय चाहिए। उन्होंने मीडिया से बातचीत में सिर्फ इतना कहा, “इस्तीफे की वजह सबको मालूम है, इसकी शुरुआत बेहाली से हुई थी।”

क्या अब ‘कमल’ थामेंगे भूपेन बोरा?

राजनीतिक गलियारों में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या बोरा अब बीजेपी का दामन थामेंगे? 32 सालों से कांग्रेस से जुड़े बोरा ने हमेशा जमीन पर उतरकर संघर्ष किया है। राहुल गांधी की न्याय यात्रा के दौरान गुवाहाटी की सड़कों पर पुलिस बैरिकेड तोड़ते हुए उनकी आक्रामक छवि आज भी चर्चा में रहती है। अगर वो कांग्रेस छोड़ते हैं, तो यह चुनाव से ठीक पहले हिमंत बिस्वा सरमा के खिलाफ बन रहे विपक्ष के माहौल के लिए एक आत्मघाती गोल जैसा होगा।

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