रामायण’ का कुंभकर्ण बना अमर चेहरा: 50 की उम्र में दुनिया छोड़ गए नलिन दवे, जानिए कैसे शूट हुआ था दिल दहला देने वाला वध सीन

टीवी इतिहास के स्वर्णिम दौर की बात हो और रामायण का जिक्र न आए, ऐसा संभव नहीं। रामानंद सागर की इस कालजयी प्रस्तुति ने न सिर्फ धार्मिक भावनाओं को छुआ, बल्कि कई कलाकारों को अमर पहचान भी दी। इन्हीं में एक नाम है कुंभकर्ण का किरदार निभाने वाले नलिन दवे का, जिनकी अदाकारी आज भी दर्शकों के दिलों में जिंदा है।

कुंभकर्ण बनकर छा गए थे नलिन दवे

गुजराती सिनेमा और थिएटर की दुनिया में मजबूत पकड़ रखने वाले नलिन दवे ने ‘रामायण’ में कुंभकर्ण का ऐसा जीवंत चित्रण किया कि वह किरदार ही उनकी पहचान बन गया। उनका विशाल व्यक्तित्व, दमदार आवाज और मंच का अनुभव इस भूमिका में पूरी तरह झलकता था।उन्होंने ‘भादर तारा वहेता पानी’, ‘सती नाग कन्या’ और ‘हमारी जंग’ जैसी फिल्मों में भी काम किया, लेकिन जो लोकप्रियता कुंभकर्ण से मिली, वैसी किसी और किरदार से नहीं मिली।

तीन साल बाद ही बुझ गया चमकता सितारा

साल 1987 में ‘रामायण’ के प्रसारण के बाद नलिन दवे को घर-घर पहचान मिली। लेकिन यह स्टारडम ज्यादा समय तक उनका साथ नहीं दे सका। महज 50 साल की उम्र में 19 जून 1990 को उनका निधन हो गया।यह बात आज भी फैंस को भावुक कर देती है कि जिस कलाकार ने इतने मजबूत किरदार को जीवंत किया, वह सफलता के कुछ ही साल बाद दुनिया को अलविदा कह गया।

ज्ञान और संवेदनाओं से भरा था कुंभकर्ण का किरदार

कुंभकर्ण को सिर्फ एक विशालकाय और भोजनप्रिय राक्षस के रूप में नहीं दिखाया गया था, बल्कि उसमें गहरी बुद्धि और धर्म की समझ भी दिखाई गई।

जब रावण ने माता सीता का हरण किया, तब कुंभकर्ण ने उसे धर्म और नीति का पाठ पढ़ाया। उसने अपने भाई को गलत कदम से लौटने की सलाह दी, लेकिन जब रावण नहीं माना तो उसने भाई धर्म निभाते हुए युद्ध का साथ दिया।यही भावनात्मक गहराई दर्शकों को छू गई और कुंभकर्ण का किरदार एक अलग ही ऊंचाई पर पहुंच गया।

वध सीन देख रो पड़ी थी जनता

लॉकडाउन के दौरान जब ‘रामायण’ का पुनः प्रसारण हुआ, तो कुंभकर्ण का वध सीन सोशल मीडिया पर ट्रेंड करने लगा।उस दृश्य में नलिन दवे की अभिनय क्षमता इतनी प्रभावशाली थी कि दर्शक भावुक हो उठे। कई लोगों ने सोशल मीडिया पर लिखा कि उन्हें कुंभकर्ण जैसा भाई चाहिए।उनकी मृत्यु का दृश्य सिर्फ एक युद्ध का अंत नहीं, बल्कि एक संवेदनशील और कर्तव्यनिष्ठ भाई की कहानी का अंत बन गया।

कैसे शूट हुआ था कुंभकर्ण का वध सीन

उस दौर में आज जैसी आधुनिक VFX तकनीक नहीं थी। रामानंद सागर ने सीमित संसाधनों में ही बड़े दृश्यों को जीवंत बनाने का कमाल किया।कुंभकर्ण के वध सीन को शूट करने के लिए कैमरा एंगल, मिनिएचर सेट और विजुअल ट्रिक्स का सहारा लिया गया। बड़े शरीर का भ्रम पैदा करने के लिए विशेष फ्रेमिंग और मल्टी-लेयर शॉट्स का उपयोग किया गया।यही वजह है कि बिना हाई-टेक तकनीक के भी यह दृश्य आज तक दर्शकों के मन में ताजा है।

आज भी क्यों याद किया जाता है कुंभकर्ण?

कुंभकर्ण का किरदार सिर्फ एक पौराणिक पात्र नहीं रहा, बल्कि भावनाओं, कर्तव्य और त्याग का प्रतीक बन गया।नलिन दवे की अदाकारी ने इसे ऐसा आयाम दिया कि दशकों बाद भी जब यह दृश्य टीवी पर आता है, तो दर्शक उसी भावनात्मक जुड़ाव को महसूस करते हैं।

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