Kerala Renaming News: ‘केरलम’ पर मुहर के बाद नया विवाद, शशि थरूर ने पूछा- अब ‘Keralite’ और ‘Keralan’ का क्या होगा?

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय कैबिनेट ने ऐतिहासिक निर्णय लेते हुए केरल का नाम बदलकर ‘केरलम’ करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। इस फैसले के बाद राजनीतिक हलकों में नई बहस छिड़ गई है। कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने इस बदलाव पर तंज कसते हुए सवाल उठाया है कि अब राज्य के निवासियों को अंग्रेजी में क्या कहा जाएगा। वहीं मुख्यमंत्री पिनरई विजयन पहले ही इस मांग को सांस्कृतिक पहचान से जोड़ चुके हैं।

नाम बदला, अब पहचान पर सवाल

कैबिनेट के फैसले के बाद शशि थरूर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर चुटीले अंदाज में प्रतिक्रिया दी। उन्होंने लिखा कि नाम बदलना ठीक है, लेकिन अंग्रेजी बोलने वालों के लिए एक छोटा सा भाषाई संकट खड़ा हो गया है। ‘केरलाइट’ और ‘केरलन’ जैसे प्रचलित शब्दों का अब क्या होगा? उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा कि ‘केरलमाइट’ किसी सूक्ष्म जीव जैसा सुनाई देता है और ‘केरलमियन’ किसी दुर्लभ खनिज जैसा। साथ ही उन्होंने मुख्यमंत्री कार्यालय को नए शब्दों के लिए प्रतियोगिता कराने की सलाह भी दे डाली।

थरूर की इस टिप्पणी के बाद सोशल मीडिया पर #Keralam और #Keralite ट्रेंड करने लगे हैं।

विधानसभा के प्रस्ताव के बाद केंद्र की मंजूरी

दरअसल, केरल विधानसभा ने 24 जून 2024 को सर्वसम्मति से राज्य का नाम ‘केरलम’ करने का प्रस्ताव पारित किया था। इससे पहले अगस्त 2023 में भी ऐसा प्रस्ताव लाया गया था, लेकिन गृह मंत्रालय की ओर से कुछ तकनीकी सुझाव दिए गए थे। संशोधन के बाद प्रस्ताव दोबारा पारित किया गया। अब केंद्र सरकार की मंजूरी के साथ प्रक्रिया अगले संवैधानिक चरण की ओर बढ़ेगी।

संविधान के अनुच्छेद 3 के तहत राज्यों के नाम में बदलाव के लिए संसद की मंजूरी आवश्यक होती है। प्रस्ताव में संविधान की पहली अनुसूची में संशोधन की मांग की गई है ताकि अंग्रेजी सहित अन्य भाषाओं में भी नाम ‘केरलम’ दर्ज किया जा सके।

‘केरलम’ सांस्कृतिक अस्मिता का प्रतीक: विजयन

मुख्यमंत्री पिनरई विजयन पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि मलयालम भाषा में राज्य को ‘केरलम’ कहा जाता है। उनके अनुसार, आजादी के आंदोलन के दौर से ही एकीकृत मलयाली पहचान की मांग रही है। उन्होंने कहा था कि संविधान की पहली अनुसूची में राज्य का नाम ‘केरल’ दर्ज है, जिसे बदलकर ‘केरलम’ किया जाना चाहिए ताकि भाषाई और सांस्कृतिक वास्तविकता परिलक्षित हो सके।

चुनावी मौसम में बढ़ी सियासी सरगर्मी

राज्य में अप्रैल-मई में विधानसभा चुनाव होने की संभावना है। ऐसे में नाम परिवर्तन का मुद्दा राजनीतिक विमर्श का हिस्सा बनता दिख रहा है। सत्तारूढ़ वाम मोर्चा इसे सांस्कृतिक सम्मान से जोड़ रहा है, जबकि विपक्ष इसे चुनावी रणनीति के नजरिए से देख रहा है।

अब सबकी नजर इस पर है कि संसद में इस प्रस्ताव को कब पेश किया जाएगा और अंग्रेजी शब्दावली में ‘केरलम’ के निवासियों के लिए कौन सा नया शब्द प्रचलन में आएगा।

Check Also

ड्रग्स के खिलाफ मोदी सरकार का बड़ा एक्शन प्लान: 2047 तक ‘नशा मुक्त भारत’ का लक्ष्य, गृह मंत्री ने बताया पूरा रोडमैप

नई दिल्ली में आयोजित RAW के रामेश्वर नाथ काव स्मृति व्याख्यान 2026 में केंद्रीय गृह …