लखनऊ: उत्तर प्रदेश को $1$ ट्रिलियन (एक लाख करोड़ डॉलर) की अर्थव्यवस्था बनाने के लक्ष्य के साथ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ एक बार फिर विदेशी धरती पर हुंकार भरने के लिए तैयार हैं। 22 फरवरी से शुरू हो रहे अपने पांच दिवसीय दौरे पर सीएम योगी सिंगापुर और जापान जाएंगे। इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य वैश्विक निवेशकों को उत्तर प्रदेश में निवेश के लिए आमंत्रित करना और राज्य में बुनियादी ढांचे को विश्वस्तरीय बनाना है।
ग्रेटर नोएडा में ‘मिनी जापान’ और ‘सिंगापुर सिटी’ का ब्लूप्रिंट
सीएम योगी के इस दौरे का सबसे आकर्षक हिस्सा ग्रेटर नोएडा में प्रस्तावित दो नए औद्योगिक शहर हैं। सूत्रों के अनुसार, यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (YEIDA) ने सेक्टर-5A में ‘जापान सिटी’ और सेक्टर-7 में ‘सिंगापुर सिटी’ विकसित करने का प्रस्ताव तैयार किया है। इसके लिए करीब 1000 एकड़ (500-500 एकड़ प्रत्येक) जमीन चिन्हित की गई है। सीएम योगी इन दोनों देशों के निवेशकों के सामने इसका औपचारिक प्रस्ताव रखेंगे, ताकि यूपी में जापानी और सिंगापुर की तकनीक और उद्योगों का एक हब बनाया जा सके।
जापान की 600 किमी/घंटा वाली मैग्लेव ट्रेन पर भी नजर
यूपी के मुख्यमंत्री इस दौरे के दौरान केवल बैठकों तक सीमित नहीं रहेंगे। वह जापान में वहां की हाई-टेक इंफ्रास्ट्रक्चर का जायजा भी लेंगे। सीएम योगी जापान की मशहूर मैग्लेव ट्रेन (Maglev Train) का अनुभव लेंगे, जो 600 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ती है। इसके अलावा, वह टोक्यो के करीब स्थित प्रसिद्ध श्री राम और हनुमान मंदिर में दर्शन-पूजन भी करेंगे, जो भारत-जापान के सांस्कृतिक संबंधों की एक झलक पेश करेगा।
अखिलेश यादव का तीखा हमला: बोले- ‘क्योटो भी चले जाइएगा’
मुख्यमंत्री के इस विदेश दौरे पर विपक्ष ने भी मोर्चा खोल दिया है। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया पर तंज कसते हुए इसे ‘मनसुख-पर्यटन’ करार दिया। अखिलेश ने लिखा, “जापान जा रहे हैं तो क्योटो भी चले जाइएगा, ताकि पता चल सके कि पीएम के संसदीय क्षेत्र काशी को क्योटो क्यों नहीं बनाया जा सका।” उन्होंने कार्यकाल के अंतिम वर्ष में इस यात्रा को ‘चला-चली की बेला’ बताते हुए सवाल उठाया कि अब नई योजनाएं कब और कैसे लागू होंगी?
निवेश का मेगा रोड शो और ‘भारत स्टैक’ का प्रदर्शन
सिंगापुर में 23 और 24 फरवरी को सीएम योगी निवेशकों के साथ गहन चर्चा करेंगे, जिसमें डेटा सेंटर, लॉजिस्टिक्स और स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट्स पर फोकस रहेगा। इसके बाद 25 और 26 फरवरी को जापान में वे दिग्गज जापानी कंपनियों (जैसे ईवी, इलेक्ट्रॉनिक्स और रेल सेक्टर) के प्रतिनिधियों से मुलाकात करेंगे। उनके साथ 18 वरिष्ठ अधिकारियों का एक प्रतिनिधिमंडल भी मौजूद रहेगा, जो तत्काल एमओयू (MoUs) पर मुहर लगाने में मदद करेगा।
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