
तेल अवीव/तेहरान/वॉशिंगटन डीसी। पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच ईरान ने अमेरिका पर सीधा और तीखा हमला बोला है। ईरानी सेना के वरिष्ठ अधिकारी ने अमेरिकी सीजफायर दावों को खारिज करते हुए कहा कि अगर अमेरिका के पास वास्तव में ताकत होती तो वह अब तक स्थिति को अपने पक्ष में मोड़ चुका होता। उन्होंने अमेरिका पर अपनी विफलताओं को समझौते का नाम देने का आरोप लगाया है।
सीजफायर दावे पर ईरान का पलटवार
ईरान ने अमेरिका के उस दावे को सिरे से नकार दिया, जिसमें संघर्ष को रोकने के लिए बातचीत की बात कही जा रही थी। ईरानी सैन्य प्रवक्ता लेफ्टिनेंट कर्नल इब्राहिम जोलफघारी ने सरकारी टीवी पर प्रसारित वीडियो संदेश में कहा कि अमेरिका केवल दिखावे की राजनीति कर रहा है और हकीकत में वह खुद से ही संवाद कर रहा है।
उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि जिस शक्ति का अमेरिका दावा करता है, वह अब उसकी नाकामी में बदल चुकी है। ईरान के मुताबिक, अगर अमेरिका वास्तव में मजबूत होता तो हालात इतने बिगड़ते ही नहीं।
“हार को समझौते का नाम न दें”
ईरानी प्रवक्ता ने अपने बयान में अमेरिका को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि वह अपनी असफलता को समझौते का नाम देकर दुनिया को गुमराह करने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि अब अमेरिका के खोखले वादों का दौर खत्म हो चुका है और दुनिया उसकी वास्तविक स्थिति को समझ चुकी है।
जंग का मानवीय असर गहराया
ईरान में जारी हमलों के बीच हालात लगातार गंभीर होते जा रहे हैं। इस संघर्ष का सबसे बड़ा असर आम नागरिकों पर पड़ा है।
अब तक लगभग 1,500 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 18,551 लोग घायल बताए जा रहे हैं। मृतकों में 8 महीने के मासूम से लेकर 88 साल तक के बुजुर्ग शामिल हैं। इस हिंसा में करीब 200 महिलाओं की भी जान गई है।
बच्चों और स्वास्थ्यकर्मियों पर भी हमला
संघर्ष की भयावहता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि 28 फरवरी को एक स्कूल पर हुए हमले में 168 बच्चों की मौत हो गई थी। इसके अलावा जंग के दौरान 55 स्वास्थ्यकर्मी भी घायल हुए हैं, जिनमें 11 की मौत हो चुकी है।
बढ़ता तनाव, अनिश्चित भविष्य
मध्य पूर्व में इस बढ़ते टकराव ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ा दी है। अमेरिका और ईरान के बीच जारी बयानबाजी से साफ है कि फिलहाल तनाव कम होने के आसार नहीं दिख रहे हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में हालात और गंभीर हो सकते हैं।
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