ईरान की ‘तेल जीवनरेखा’ खर्ग आईलैंड पर क्यों नहीं बरस रहे अमेरिका-इजरायल के बम? छोटे से द्वीप में छिपा है तेहरान की अर्थव्यवस्था का राज


मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच दुनिया की नजरें ईरान के उस छोटे से द्वीप पर टिकी हुई हैं, जिसे तेहरान की आर्थिक धड़कन कहा जाता है। फारस की खाड़ी में स्थित खर्ग आईलैंड ईरान के तेल निर्यात का सबसे बड़ा केंद्र है। यही वजह है कि तमाम तनाव और सैन्य बयानबाजी के बावजूद अब तक अमेरिका और इजरायल ने इस द्वीप को निशाना नहीं बनाया है।

खर्ग आईलैंड: ईरान की तेल अर्थव्यवस्था का केंद्र

फारस की खाड़ी में स्थित खर्ग आईलैंड आकार में भले ही छोटा हो, लेकिन ईरान के लिए इसका महत्व बेहद बड़ा है। ईरान के कुल तेल निर्यात का अधिकांश हिस्सा इसी द्वीप के टर्मिनलों से दुनिया के अलग-अलग देशों तक पहुंचता है। विशाल तेल भंडारण टैंक, पाइपलाइन नेटवर्क और निर्यात सुविधाएं इस द्वीप को ईरान की ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला का सबसे अहम केंद्र बनाती हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर खर्ग आईलैंड पर कोई बड़ा हमला होता है, तो इससे वैश्विक तेल बाजार में भी भारी उथल-पुथल मच सकती है। यही कारण है कि इसे केवल ईरान ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार के लिहाज से भी बेहद संवेदनशील माना जाता है।

अमेरिका और इजरायल के लिए क्यों मुश्किल है हमला

सैन्य विश्लेषकों के अनुसार खर्ग आईलैंड पर हमला करना इतना आसान नहीं है। ईरान ने इस द्वीप को मजबूत एयर डिफेंस सिस्टम, मिसाइल बैटरियों और नौसैनिक सुरक्षा से घेर रखा है। फारस की खाड़ी में ईरान की नौसेना और रिवोल्यूशनरी गार्ड की मौजूदगी भी किसी भी हमले को जोखिम भरा बना देती है।

इसके अलावा यह भी आशंका रहती है कि अगर खर्ग आईलैंड पर हमला हुआ तो ईरान जवाबी कार्रवाई में होर्मुज जलडमरूमध्य को प्रभावित कर सकता है। यह जलमार्ग दुनिया के सबसे अहम तेल आपूर्ति रास्तों में से एक है। ऐसे में वैश्विक ऊर्जा संकट पैदा होने का खतरा बढ़ सकता है।

वैश्विक तेल बाजार पर पड़ सकता है बड़ा असर

ऊर्जा विशेषज्ञों का कहना है कि खर्ग आईलैंड पर हमला सिर्फ ईरान तक सीमित मुद्दा नहीं रहेगा। इससे अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतों में अचानक भारी उछाल आ सकता है। कई देशों की ऊर्जा सुरक्षा भी प्रभावित हो सकती है।

इसी वजह से अमेरिका और इजरायल जैसे देश सैन्य विकल्पों पर विचार करते समय इस द्वीप के संभावित असर को ध्यान में रखते हैं। यही कारण है कि तनाव के बावजूद अब तक इस रणनीतिक द्वीप को सीधे निशाना नहीं बनाया गया है।

रणनीतिक संतुलन बनाए रखने की कोशिश

मध्य पूर्व में जारी शक्ति संतुलन की राजनीति में खर्ग आईलैंड एक अहम कड़ी बना हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस द्वीप को निशाना बनाना पूरे क्षेत्र में व्यापक संघर्ष को जन्म दे सकता है। इसलिए फिलहाल सभी पक्ष रणनीतिक संयम बरतते दिखाई देते हैं।

हालांकि क्षेत्र में बढ़ती सैन्य गतिविधियों और राजनीतिक टकराव के बीच खर्ग आईलैंड का महत्व लगातार चर्चा में बना हुआ है। आने वाले समय में यह छोटा सा द्वीप वैश्विक ऊर्जा और भू-राजनीति दोनों के लिए अहम भूमिका निभाता रह सकता है।

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