
दुनिया के सबसे अहम समुद्री मार्गों में से एक होर्मुज स्ट्रेट को लेकर एक बार फिर वैश्विक हलचल तेज हो गई है। इस रणनीतिक जलडमरूमध्य पर अब ईरान की नजर सिर्फ नियंत्रण तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि वह यहां से गुजरने वाले जहाजों से टोल वसूलने की योजना पर गंभीरता से विचार कर रहा है। अगर यह योजना लागू होती है, तो ईरान के लिए राजस्व का एक बड़ा स्रोत खुल सकता है।
क्या है होर्मुज स्ट्रेट की अहमियत?
होर्मुज स्ट्रेट दुनिया की तेल आपूर्ति का एक बड़ा केंद्र माना जाता है। वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल और गैस का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से होकर गुजरता है। ऐसे में यहां किसी भी तरह का बदलाव सीधे अंतरराष्ट्रीय बाजार और कई देशों की अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर सकता है।
ईरान क्यों चाहता है टोल वसूली का अधिकार?
ईरान का मानना है कि इस समुद्री मार्ग की सुरक्षा और निगरानी में उसकी महत्वपूर्ण भूमिका है। ऐसे में वह इसे आर्थिक अवसर के रूप में भी देख रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान अब इस बात पर विचार कर रहा है कि जो जहाज इस रास्ते से गुजरते हैं, उनसे शुल्क लिया जाए। इससे उसकी अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल सकती है, खासकर उस समय जब वह प्रतिबंधों के दबाव का सामना कर रहा है।
अमेरिका से जुड़ा है यह आइडिया
दिलचस्प बात यह है कि इस तरह की व्यवस्था का विचार पूरी तरह नया नहीं है। पहले अमेरिका की ओर से भी यह सुझाव दिया गया था कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों की सुरक्षा के लिए उपयोग करने वाले देशों से शुल्क लिया जा सकता है। अब ईरान उसी तर्ज पर इसे लागू करने की दिशा में सोच रहा है।
क्या होंगे वैश्विक असर?
अगर ईरान इस योजना को लागू करता है, तो इसका असर सीधे तेल की कीमतों पर पड़ सकता है। जहाजों पर अतिरिक्त लागत बढ़ेगी, जिसका असर अंततः उपभोक्ताओं तक पहुंचेगा। इसके अलावा, यह कदम कई देशों के साथ तनाव भी बढ़ा सकता है, क्योंकि होर्मुज स्ट्रेट को अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग माना जाता है।
बढ़ सकता है भू-राजनीतिक तनाव
विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले से खाड़ी क्षेत्र में पहले से मौजूद तनाव और बढ़ सकता है। अमेरिका और उसके सहयोगी देश इस कदम का विरोध कर सकते हैं, जिससे हालात और जटिल हो सकते हैं।
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