होर्मुज स्ट्रेट में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच समुद्री जहाजों की आवाजाही ने नई तस्वीर सामने रखी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की धमकियों और अमेरिकी नौसेना की मौजूदगी के बावजूद कई वाणिज्यिक जहाज ईरान के करीब वाले समुद्री रास्ते से गुजर रहे हैं। उपलब्ध आंकड़ों से संकेत मिलता है कि होर्मुज में इस समय अमेरिका के दबाव के बावजूद ईरान के प्रभाव को नजरअंदाज करना जहाजों के लिए आसान नहीं है।
समुद्री खुफिया कंपनी केप्लर के आंकड़ों के मुताबिक, 1 से 19 अगस्त के बीच 112 तेल, एलपीजी और एलएनजी ले जाने वाले जहाज होर्मुज स्ट्रेट से गुजरे। इनमें 21 जहाजों ने खुले तौर पर ईरानी रूट का इस्तेमाल किया, जबकि सिर्फ 2 जहाज ओमानी रूट से गुजरे। बाकी जहाजों की वास्तविक आवाजाही स्पष्ट रूप से ट्रैक नहीं की जा सकी।
236 जहाज गुजरे, 148 की राह साफ नहीं
अल जजीरा की रिपोर्ट के अनुसार, 1 से 19 अगस्त के बीच कुल 236 जहाज होर्मुज स्ट्रेट से होकर गुजरे। इनमें 148 जहाजों की राह या पहचान से जुड़ी जानकारी स्पष्ट नहीं हो सकी। बड़ी संख्या में जहाजों के ट्रैकिंग डेटा का अस्पष्ट होना इस रणनीतिक समुद्री मार्ग की मौजूदा संवेदनशीलता को दिखाता है।
इन आंकड़ों के आधार पर यह सवाल और महत्वपूर्ण हो गया है कि अमेरिकी दबाव के बावजूद क्या जहाज ईरान के प्रभाव वाले रूट का इस्तेमाल कर रहे हैं। खासकर तब, जब अमेरिका और ईरान दोनों ही होर्मुज स्ट्रेट पर अपने-अपने प्रभाव और अधिकार का दावा कर रहे हैं।
ट्रंप का दावा- अमेरिकी सेना के नियंत्रण में होर्मुज
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का कहना है कि होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले समुद्री यातायात पर अमेरिकी सेना का नियंत्रण है। ट्रंप ने इस क्षेत्र की जिम्मेदारी अमेरिका द्वारा अपने हाथ में लेने की संभावना के संकेत भी दिए हैं।
दूसरी ओर, ईरान का रुख इससे बिल्कुल अलग है। तेहरान का कहना है कि उसकी अनुमति के बिना कोई जहाज होर्मुज स्ट्रेट से सुरक्षित तरीके से नहीं गुजर सकता। इस वजह से रणनीतिक समुद्री मार्ग पर अमेरिका और ईरान के दावों के बीच सीधा टकराव दिखाई दे रहा है।
ईरानी और ओमानी रूट में क्या अंतर है?
होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों के लिए मौजूदा हालात में दो प्रमुख समुद्री रास्तों की चर्चा हो रही है। पहला रास्ता ईरान के तट के करीब है, जबकि दूसरा ओमान की तरफ से होकर गुजरता है।
ईरानी रूट: यह स्ट्रेट के उत्तरी हिस्से में ईरान के तट के पास स्थित है। यह लारक और किश्म द्वीपों के आसपास से होकर गुजरता है और ईरान के बंदरगाहों तथा तेल टर्मिनलों के नजदीक पड़ता है।
ओमानी रूट: यह स्ट्रेट के दक्षिणी हिस्से में ओमान के करीब है और ईरान के तट से अपेक्षाकृत दूर है। अमेरिका जहाजों को इसी रास्ते से गुजरने के लिए प्रोत्साहित कर रहा है। अमेरिकी नौसेना की सुरक्षा में चलने वाले कुछ वाणिज्यिक जहाज भी इस रूट का इस्तेमाल कर रहे हैं।
पहले एक ही समुद्री रास्ते से गुजरते थे जहाज
अमेरिका और ईरान के बीच मौजूदा तनाव से पहले होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों की आवाजाही को लेकर ऐसी दोहरी व्यवस्था की चर्चा नहीं थी। जहाजों का रूट बंदरगाह, समुद्री समझौतों और सुरक्षा परिस्थितियों को ध्यान में रखकर तय किया जाता था।
तनाव बढ़ने के बाद ईरान के करीब और ओमान के करीब दो अलग-अलग रास्तों को लेकर स्थिति बदल गई है। यही वजह है कि अब किसी जहाज का रूट चुनना सिर्फ व्यापारिक फैसला नहीं, बल्कि सुरक्षा और भू-राजनीतिक जोखिम से जुड़ा मामला भी बन गया है।
ओमान को लेकर भी ट्रंप की चेतावनी
ट्रंप ने ओमान पर बमबारी की धमकी भी दी है। ओमान अमेरिका का सहयोगी है और होर्मुज स्ट्रेट के दूसरी तरफ ईरान के सामने स्थित है। इस समुद्री मार्ग का कुछ हिस्सा ईरान और ओमान दोनों के अधिकार क्षेत्र से जुड़ा हुआ है।
बताया जा रहा है कि ट्रंप की धमकी का एक मकसद मस्कट को ईरान के साथ होर्मुज स्ट्रेट के संयुक्त संचालन से जुड़े किसी समझौते की दिशा में आगे बढ़ने से रोकना है। अगर ऐसा होता है तो स्ट्रेट पर पहले से मौजूद भू-राजनीतिक तनाव और बढ़ सकता है।
सिर्फ 2 जहाजों ने चुना ओमानी रास्ता
केप्लर के आंकड़ों में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि 1 से 19 अगस्त के दौरान होर्मुज से गुजरने वाले 112 तेल, एलपीजी और एलएनजी जहाजों में से 21 ने ईरानी रूट का इस्तेमाल किया। इसके मुकाबले केवल 2 जहाज ओमानी रूट पर गए।
हालांकि, यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि सभी जहाजों का रूट सार्वजनिक रूप से स्पष्ट नहीं है। बड़ी संख्या में जहाजों की ट्रैकिंग जानकारी उपलब्ध नहीं होने के कारण इन आंकड़ों से यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि हर जहाज ने ईरानी रास्ता ही चुना। फिर भी उपलब्ध स्पष्ट आंकड़े ईरान के करीब वाले रूट के इस्तेमाल की अहम तस्वीर जरूर पेश करते हैं।
होर्मुज पर किसका दबदबा?
होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा समुद्री मार्गों में से एक है। यहां से तेल, एलपीजी और एलएनजी ले जाने वाले जहाजों की आवाजाही होती है। इसलिए इस रास्ते पर अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव सिर्फ क्षेत्रीय सुरक्षा का मुद्दा नहीं है, बल्कि वैश्विक ऊर्जा बाजार और समुद्री व्यापार पर भी असर डाल सकता है।
मौजूदा आंकड़ों में एक तरफ अमेरिका अपनी सैन्य मौजूदगी और नियंत्रण का दावा कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ ईरान अपने तट के पास से गुजरने वाले समुद्री यातायात पर प्रभाव बनाए रखने की कोशिश कर रहा है। ऐसे में होर्मुज स्ट्रेट में वास्तविक नियंत्रण किसके हाथ में है, यह सवाल अभी भी पूरी तरह स्पष्ट नहीं हुआ है।
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