Iran-US Nuclear Deal: प्रतिबंध हटें तो समझौता संभव, मिसाइल प्रोजेक्ट पर अड़ा ईरान; जेनेवा वार्ता से पहले बढ़ा तनाव

वॉशिंगटन डीसी/तेहरान। अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु समझौते को लेकर जमी बर्फ पिघलने के संकेत मिल रहे हैं। ईरान ने साफ किया है कि यदि अमेरिका आर्थिक प्रतिबंधों में राहत देने को तैयार होता है तो वह अपने परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत के लिए तैयार है। हालांकि, बैलिस्टिक मिसाइल प्रोजेक्ट को लेकर तेहरान ने स्पष्ट कर दिया है कि यह उसकी ‘रेड लाइन’ है और इस पर कोई समझौता नहीं होगा।

ईरान के उप विदेश मंत्री मजीद तख्त-रवांची ने BBC को दिए इंटरव्यू में कहा कि यदि वॉशिंगटन प्रतिबंधों को हटाने पर ठोस बातचीत करता है तो तेहरान अपने परमाणु कार्यक्रम से जुड़े कई मुद्दों पर लचीलापन दिखा सकता है। दोनों देशों के बीच अगला दौर स्विट्जरलैंड के जिनेवा में प्रस्तावित है, जिससे पहले बयानबाजी तेज हो गई है।

परमाणु कार्यक्रम पर बात, मिसाइल पर नहीं

तख्त-रवांची ने दोहराया कि ईरान अपने बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम पर अमेरिका से किसी भी प्रकार की बातचीत नहीं करेगा। उनका कहना है कि यह कार्यक्रम पूरी तरह रक्षात्मक है और क्षेत्रीय हमलों के दौरान इसी क्षमता ने ईरान की सुरक्षा सुनिश्चित की।

ईरान का तर्क है कि जब उसके परमाणु ठिकानों पर हमले हुए, तब उसकी मिसाइलों ने जवाबी सुरक्षा प्रदान की। ऐसे में अपनी रक्षा क्षमता से समझौता करना राष्ट्रीय हितों के खिलाफ होगा। इजराइल और अमेरिका लगातार इस मुद्दे को उठाते रहे हैं, जिससे वार्ता में गतिरोध बना हुआ है।

अमेरिका का रुख सख्त, ट्रम्प की चेतावनी

दूसरी ओर, अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने हाल में कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प समझौता चाहते हैं, लेकिन ईरान के साथ डील करना बेहद जटिल है। ट्रम्प पहले ही चेतावनी दे चुके हैं कि यदि ईरान के परमाणु कार्यक्रम को सीमित करने पर सहमति नहीं बनी तो सैन्य विकल्प भी खुला है।

अमेरिका ने क्षेत्र में अपनी सैन्य तैनाती भी बढ़ा दी है। मिडिल-ईस्ट में अमेरिकी मौजूदगी को देखते हुए तनाव और बढ़ गया है।

60% एनरिच्ड यूरेनियम घटाने का प्रस्ताव

ईरान ने दावा किया है कि उसने 60% तक संवर्धित यूरेनियम के स्तर को कम करने का प्रस्ताव दिया है। यह स्तर हथियार-ग्रेड के करीब माना जाता है, जिससे अंतरराष्ट्रीय समुदाय में शंका बनी रहती है। हालांकि, तेहरान लगातार इस आरोप से इनकार करता रहा है कि वह परमाणु हथियार बनाने की दिशा में काम कर रहा है।

रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान के पास 400 किलोग्राम से अधिक उच्च स्तर पर संवर्धित यूरेनियम का भंडार है। वर्ष 2015 के समझौते के तहत ईरान ने अपना यूरेनियम रूस भेजा था। इस बार भी रूस ने सामग्री स्वीकार करने की पेशकश की है, लेकिन इस पर अंतिम निर्णय अभी बाकी है।

अमेरिका की चार प्रमुख शर्तें

अमेरिका की ओर से समझौते के लिए चार प्रमुख शर्तें सामने रखी गई हैं—

  • यूरेनियम एनरिचमेंट पर पूर्ण प्रतिबंध

  • पहले से संवर्धित यूरेनियम को हटाना

  • लंबी दूरी की मिसाइलों की संख्या सीमित करना

  • क्षेत्रीय प्रॉक्सी समूहों को समर्थन बंद करना

ईरान का कहना है कि यूरेनियम संवर्धन उसका संप्रभु अधिकार है और सैन्य दबाव या प्रतिबंधों के जरिए उससे यह कार्यक्रम नहीं छुड़वाया जा सकता।

क्षेत्र में बढ़ती अमेरिकी सैन्य मौजूदगी

तनाव के बीच अमेरिका अपना सबसे बड़ा एयरक्राफ्ट कैरियर USS जेराल्ड आर. फोर्ड मिडिल-ईस्ट भेज रहा है। यह परमाणु ऊर्जा से संचालित अत्याधुनिक युद्धपोत है। इसके अलावा USS अब्राहम लिंकन समेत अन्य युद्धपोत पहले से तैनात हैं। हाल के हफ्तों में गाइडेड-मिसाइल डिस्ट्रॉयर, फाइटर जेट और निगरानी विमान भी क्षेत्र में भेजे गए हैं।

ईरान ने 40 हजार से अधिक अमेरिकी सैनिकों की तैनाती पर चिंता जताई है और संकेत दिया है कि यदि उसके अस्तित्व को खतरा हुआ तो जवाबी कार्रवाई की जाएगी। तेहरान का आरोप है कि क्षेत्रीय अस्थिरता के पीछे इजराइल की भी भूमिका है, जो इस वार्ता को पटरी से उतरते देखना चाहता है।

क्या जेनेवा में बनेगी बात?

जेनेवा में प्रस्तावित वार्ता को लेकर दोनों पक्षों के बयान अलग-अलग संकेत दे रहे हैं। एक ओर प्रतिबंधों में राहत की शर्त पर ईरान लचीलापन दिखाने की बात कर रहा है, वहीं अमेरिका मिसाइल कार्यक्रम और क्षेत्रीय गतिविधियों को भी एजेंडे में शामिल करना चाहता है।

अब सबकी नजर जेनेवा में होने वाली अगली बैठक पर है, जहां यह तय होगा कि वर्षों से चला आ रहा परमाणु विवाद सुलझने की दिशा में बढ़ेगा या टकराव और गहराएगा।

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