
तेहरान/वॉशिंगटन। पश्चिम एशिया की सियासत एक बार फिर गरमा गई है। अमेरिका और इजरायल के हमलों के आठ महीने बाद अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने दावा किया है कि ईरान ने दोबारा अपना परमाणु कार्यक्रम सक्रिय कर लिया है। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि तस्वीर उतनी सीधी नहीं है जितनी बयानबाजी में दिखाई जा रही है। सवाल यह है कि क्या वाकई ईरान न्यूक्लियर हथियार बनाने की दिशा में तेजी से बढ़ रहा है या फिर यह रणनीतिक दबाव की राजनीति है?
हमले के बाद बदला ट्रंप का रुख
जून 2025 में अमेरिका और Israel ने ईरान की न्यूक्लियर साइट्स पर हवाई हमले किए थे। उस समय ट्रंप ने दावा किया था कि ईरान का परमाणु ढांचा पूरी तरह तबाह कर दिया गया है। लेकिन अब उनका लहजा बदला हुआ नजर आ रहा है। हालिया संबोधन में उन्होंने कहा कि अमेरिकी चेतावनियों के बावजूद ईरान फिर से संवेदनशील परमाणु गतिविधियां शुरू कर रहा है।
ट्रंप ने दो टूक कहा कि अमेरिका किसी भी सूरत में ईरान को परमाणु हथियार हासिल नहीं करने देगा। उनके बयान ऐसे समय आए हैं जब वॉशिंगटन ने पश्चिम एशिया में सैन्य मौजूदगी बढ़ा दी है, वहीं जिनेवा में अमेरिका और ईरान के बीच कूटनीतिक बातचीत भी जारी है। डिप्लोमेसी और डिफेंस—दोनों मोर्चों पर हलचल तेज है।
कितना तबाह हुआ था ईरान का परमाणु ढांचा?
हमलों के बाद शुरुआती आकलनों में सामने आया था कि एक प्रमुख यूरेनियम एनरिचमेंट फैसिलिटी को भारी नुकसान पहुंचा, जबकि अन्य दो ठिकानों को आंशिक क्षति हुई। विशेषज्ञों के मुताबिक इन हमलों से ईरान की परमाणु प्रगति कई महीनों पीछे जरूर गई, लेकिन उसकी एनरिचमेंट क्षमता पूरी तरह खत्म नहीं हुई।
रिपोर्टों के अनुसार, हमलों से पहले ईरान ने अपने अत्यधिक समृद्ध (Highly Enriched) यूरेनियम के भंडार को सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट कर दिया था। यही वजह है कि सैन्य कार्रवाई के बावजूद तेहरान की पूरी परमाणु क्षमता पर निर्णायक चोट नहीं की जा सकी।
IAEA की नजर और अंतरराष्ट्रीय चिंता
International Atomic Energy Agency के प्रमुख Rafael Grossi पहले ही संकेत दे चुके हैं कि हमलों से नुकसान जरूर हुआ, लेकिन संवर्धित यूरेनियम का बड़ा हिस्सा संभवतः पहले ही हटा लिया गया था। ऐसे में यह मानना मुश्किल है कि ईरान की तकनीकी क्षमता पूरी तरह समाप्त हो गई।
ट्रंप प्रशासन के हालिया बयानों से भी संकेत मिलता है कि स्ट्राइक ने ईरान की संवेदनशील परमाणु गतिविधियों को स्थायी रूप से नहीं रोका है।
क्या सच में हथियार के करीब है ईरान?
ईरान लगातार कहता आया है कि उसका परमाणु कार्यक्रम केवल असैनिक ऊर्जा उत्पादन के लिए है, न कि हथियार निर्माण के लिए। ईरानी विदेश मंत्री Abbas Araghchi ने साफ कहा है कि तेहरान किसी भी परिस्थिति में परमाणु हथियार नहीं बनाएगा।
हालांकि पश्चिमी देशों का आरोप है कि ईरान ने यूरेनियम को जरूरत से ज्यादा स्तर तक एनरिच किया है। विशेषज्ञों का कहना है कि केवल 90 प्रतिशत तक यूरेनियम संवर्धन कर लेना ही परमाणु बम तैयार कर लेने के बराबर नहीं है। असल चुनौती होती है—वॉरहेड डिजाइन, मिनिएचराइजेशन और डिलीवरी सिस्टम का विकास।
रॉयल यूनाइटेड सर्विसेज इंस्टीट्यूट की विशेषज्ञ डारिया डोल्जिकोवा के मुताबिक अत्यधिक संवर्धित यूरेनियम होना लंबी प्रक्रिया का एक हिस्सा भर है। हथियार तैयार करना और उसे मिसाइल सिस्टम से जोड़ना कहीं अधिक जटिल और समय लेने वाला काम है।
कूटनीति बनाम सैन्य विकल्प
एक तरफ अमेरिका सैन्य ताकत का प्रदर्शन कर रहा है, दूसरी ओर बातचीत के दरवाजे भी खुले हैं। जिनेवा में जारी वार्ता इस बात का संकेत है कि वॉशिंगटन अभी भी कूटनीतिक समाधान चाहता है। लेकिन अगर बातचीत विफल होती है, तो सैन्य विकल्प की चर्चा तेज हो सकती है।
फिलहाल स्थिति अनिश्चित बनी हुई है। ट्रंप के ताजा दावे ने भू-राजनीतिक समीकरणों को फिर से केंद्र में ला दिया है। आने वाले महीनों में यह साफ होगा कि ईरान का परमाणु कार्यक्रम वास्तव में किस दिशा में बढ़ रहा है और क्या दुनिया एक और बड़े टकराव की ओर बढ़ रही है।
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