तेहरान/अम्मान। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच जॉर्डन एक बार फिर ईरान के निशाने पर आ गया है। अमेरिका और इजरायल के करीबी सहयोगी माने जाने वाले जॉर्डन पर ईरान की ओर से बैलिस्टिक मिसाइल हमला किए जाने का दावा किया गया है। ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) का कहना है कि जॉर्डन स्थित अमेरिकी सैन्य अड्डे को लक्ष्य बनाकर मिसाइलें दागी गईं, जिससे वहां भारी नुकसान हुआ। हालांकि इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि अभी तक नहीं हो सकी है।
अमेरिकी हमलों के बाद बदला समीकरण, जॉर्डन बना नया निशाना
अमेरिका द्वारा ईरान से जुड़े ठिकानों पर की गई सैन्य कार्रवाई के बाद क्षेत्रीय तनाव और गहरा गया है। इसी क्रम में ईरान ने उन देशों को भी निशाने पर लेना शुरू किया है, जहां अमेरिकी सैन्य मौजूदगी मजबूत है। जॉर्डन का अल-अजराक एयर बेस लंबे समय से अमेरिकी सेना के लिए रणनीतिक महत्व रखता है और खाड़ी क्षेत्र में सैन्य अभियानों का प्रमुख केंद्र माना जाता है।
ईरानी सैन्य नेतृत्व का दावा है कि इस एयर बेस पर बैलिस्टिक मिसाइलों से हमला किया गया। बताया गया कि हमले में सैन्य ढांचे को नुकसान पहुंचा और कुछ लड़ाकू विमान भी प्रभावित हुए। हालांकि जॉर्डन और अमेरिकी अधिकारियों की ओर से इन दावों की पुष्टि नहीं की गई है।
आखिर ईरान का ‘दुश्मन नंबर 1’ क्यों माना जाता है जॉर्डन?
जॉर्डन के राजा किंग अब्दुल्ला द्वितीय को पैगंबर मोहम्मद का वंशज माना जाता है। इसके बावजूद ईरान और जॉर्डन के रिश्ते वर्षों से तनावपूर्ण रहे हैं। इसकी सबसे बड़ी वजह जॉर्डन का अमेरिका और इजरायल के साथ मजबूत रणनीतिक सहयोग है।
विशेषज्ञों का मानना है कि जॉर्डन क्षेत्र में पश्चिमी देशों का भरोसेमंद साझेदार है। सुरक्षा, खुफिया सहयोग और सैन्य अभियानों में उसकी सक्रिय भूमिका ईरान को असहज करती रही है। यही कारण है कि जब भी क्षेत्रीय संघर्ष बढ़ता है, जॉर्डन अप्रत्यक्ष या प्रत्यक्ष रूप से ईरानी रणनीति का हिस्सा बन जाता है।
अल-अजराक एयर बेस क्यों है इतना महत्वपूर्ण?
जॉर्डन का अल-अजराक एयर बेस मध्य पूर्व में अमेरिकी सैन्य अभियानों का एक अहम केंद्र माना जाता है। यहां से निगरानी, खुफिया गतिविधियां और सैन्य उड़ानें संचालित होती हैं। क्षेत्रीय सुरक्षा समीकरण में इसकी भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। यही वजह है कि ईरान लंबे समय से इस ठिकाने को अमेरिका के प्रभाव का प्रतीक मानता रहा है।
पश्चिम एशिया में बढ़ सकती है अस्थिरता
विश्लेषकों का कहना है कि यदि अमेरिका और ईरान के बीच मौजूदा तनाव इसी तरह बढ़ता रहा तो इसका असर पूरे पश्चिम एशिया पर पड़ सकता है। जॉर्डन, इराक, सीरिया और खाड़ी देशों की सुरक्षा स्थिति भी प्रभावित हो सकती है। फिलहाल दुनिया की नजर इस बात पर टिकी है कि आने वाले दिनों में अमेरिका, जॉर्डन और ईरान की ओर से क्या कदम उठाए जाते हैं।
क्षेत्रीय राजनीति में जॉर्डन की बढ़ती चुनौती
जॉर्डन लंबे समय से खुद को क्षेत्रीय संघर्षों से दूर रखने की कोशिश करता रहा है, लेकिन अमेरिका के साथ उसकी रणनीतिक साझेदारी और इजरायल से संबंध उसे बार-बार विवादों के केंद्र में ला देते हैं। ऐसे में ईरान के ताजा दावों ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या जॉर्डन आने वाले समय में पश्चिम एशिया के बड़े भू-राजनीतिक टकराव का अहम मोर्चा बन सकता है।
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