
नई दिल्ली। मिडिल ईस्ट की आग अब हिंद महासागर की लहरों तक पहुंच गई है। ईरान और इजरायल के बीच जारी जंग ने उस वक्त बेहद खतरनाक मोड़ ले लिया जब अमेरिकी नौसेना ने भारतीय नौसेना के ‘मेहमान’ ईरानी युद्धपोत IRIS डेना को समंदर की गहराइयों में दफन कर दिया। इस हमले के बाद तेहरान और वाशिंगटन के बीच सीधा टकराव शुरू हो गया है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने इसे ‘समुद्र में अत्याचार’ करार देते हुए ऐलान किया है कि अमेरिका को इस हिमाकत की ऐसी सजा मिलेगी जिसे वह ताउम्र याद रखेगा।
पनडुब्बी से टॉरपीडो अटैक: 87 नौसैनिकों की मौत, 60 अब भी लापता
मंगलवार की रात अमेरिकी नौसेना की एक पनडुब्बी ने अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में मौजूद ईरानी युद्धपोत IRIS डेना पर बिना किसी चेतावनी के टॉरपीडो से हमला किया। हमले की तीव्रता इतनी अधिक थी कि युद्धपोत चंद मिनटों में डूब गया। इस भयावह हमले में 87 ईरानी नौसैनिकों के मारे जाने की पुष्टि हुई है, जबकि 60 से अधिक नौसैनिक अभी भी लापता हैं जिनकी तलाश जारी है। घायल सैनिकों को तत्काल श्रीलंका के गाले स्थित अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां 32 नौसैनिकों का इलाज चल रहा है।
भारतीय नौसेना का ‘अतिथि’ था IRIS डेना
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने एक्स (Twitter) पर भावुक और कड़ा पोस्ट साझा करते हुए कहा कि यह हमला सिर्फ ईरान पर नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय नियमों पर प्रहार है। उन्होंने बताया कि IRIS डेना हाल ही में भारत में आयोजित एक नौसैनिक अभ्यास में हिस्सा लेकर लौट रहा था और वह भारतीय नौसेना का अतिथि था। तट से 2,000 मील दूर बिना किसी उकसावे के किए गए इस हमले को ईरान ने ‘जघन्य अपराध’ बताया है।
पेंटागन की हुंकार: ‘जीतने के लिए लड़ रहे हैं हम’
दूसरी ओर, अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने इस हमले की पुष्टि करते हुए इसे बड़ी उपलब्धि बताया है। उन्होंने दावा किया कि दूसरे विश्वयुद्ध के बाद यह पहली बार है जब अमेरिका ने दुश्मन के किसी युद्धपोत को समंदर में डुबोया है। पेंटागन के मुताबिक, उनका लक्ष्य ईरान की नौसैनिक क्षमता को पूरी तरह खत्म करना है। अमेरिकी जनरल डैन कैनी ने यहां तक दावा किया कि वे अब तक ईरान के 20 से ज्यादा जंगी जहाजों को नष्ट कर चुके हैं और इस युद्ध में अब तक 1,000 से अधिक लोग मारे जा चुके हैं।
खामेनेई की मौत के बाद भड़का ईरान, परमाणु संयंत्रों पर भी मंडराया खतरा
ईरान और अमेरिका के बीच तनाव पिछले शनिवार को उस वक्त चरम पर पहुंच गया था जब इजरायल और अमेरिका ने संयुक्त कार्रवाई में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई की हत्या का दावा किया था। साथ ही ईरान के नतांज परमाणु संयंत्र पर भी हमले की खबरें आई थीं। इन घटनाओं के बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए इजरायली और अमेरिकी अड्डों पर मिसाइल और ड्रोन की बरसात कर दी है, जिससे पूरे क्षेत्र में महायुद्ध का खतरा पैदा हो गया है।
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