
नई दिल्ली: देशभर में मई की शुरुआत के साथ मौसम ने अचानक करवट ली है। कहीं तेज आंधी, कहीं ओलावृष्टि तो कहीं झमाझम बारिश ने गर्मी से राहत जरूर दी है, लेकिन इसके पीछे छिपे खतरे अब सामने आने लगे हैं। भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने पूर्वी भारत के लिए एक बड़ा अलर्ट जारी किया है। पश्चिम बंगाल, ओडिशा और बांग्लादेश के इलाकों में ‘कालबैशाखी’ नामक खतरनाक मौसमी तूफान के सक्रिय होने की आशंका जताई गई है, जो भारी नुकसान का कारण बन सकता है।
क्या है कालबैशाखी, क्यों बनता है खतरा?
कालबैशाखी दरअसल प्री-मानसून के दौरान आने वाला एक शक्तिशाली तूफानी सिस्टम है, जो खासतौर पर अप्रैल और मई के महीनों में पूर्वी भारत में सक्रिय होता है। इसकी पहचान तेज रफ्तार हवाएं, गरज-चमक के साथ भारी बारिश और कई बार ओलावृष्टि से होती है। हालांकि इससे कुछ समय के लिए गर्मी से राहत मिलती है, लेकिन इसके साथ आने वाली तेज हवाएं पेड़, बिजली के खंभे और कच्चे मकानों को भारी नुकसान पहुंचा सकती हैं।
बंगाल-ओडिशा में दस्तक, बढ़ी सतर्कता
मौसम विभाग के अनुसार, इस बार कालबैशाखी की तीव्रता अधिक रहने की संभावना है। पश्चिम बंगाल के कोलकाता और ओडिशा के कई इलाकों में इसके शुरुआती असर देखने को भी मिले हैं। अचानक आई तेज हवाओं और बारिश ने जनजीवन को प्रभावित किया है। प्रशासन ने लोगों को सतर्क रहने और अनावश्यक बाहर न निकलने की सलाह दी है।
देश-दुनिया में बदला मौसम का मिजाज
दिलचस्प बात यह है कि जहां भारत में प्री-मानसून गतिविधियां तेज हो रही हैं, वहीं यूरोप के ग्रीस और तुर्की जैसे देशों में असामान्य ठंड दर्ज की जा रही है। कई जगहों पर बर्फबारी और तेज हवाओं का दौर जारी है। मौसम वैज्ञानिक इसे वैश्विक जलवायु परिवर्तन का असर मान रहे हैं, जिससे मौसम के पैटर्न में तेजी से बदलाव हो रहा है।
राहत के साथ खतरे का संकेत
विशेषज्ञों का कहना है कि भले ही इन मौसमी बदलावों से लोगों को भीषण गर्मी से राहत मिल रही हो, लेकिन यह आने वाले बड़े मौसमी खतरों का संकेत भी हो सकता है। कालबैशाखी जैसे तूफान कृषि, बिजली व्यवस्था और आम जनजीवन पर गंभीर असर डाल सकते हैं।
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