S-400 से मजबूत होगा भारत का एयर डिफेंस कवच. DAC की अहम बैठक में मिली स्वीकृति

भारत की सैन्य ताकत को नई धार देने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए रक्षा अधिग्रहण परिषद (DAC) ने राफेल लड़ाकू विमानों के लिए लंबी दूरी की SCALP मिसाइलों और रूसी S-400 एयर डिफेंस सिस्टम के लिए अतिरिक्त मिसाइलों की खरीद को मंजूरी दे दी है। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब ‘ऑपरेशन सिंदूर’ में इन हथियारों की प्रभावशीलता चर्चा का केंद्र रही थी। रक्षा मंत्रालय के इस निर्णय से भारतीय वायुसेना की स्ट्राइक क्षमता और हवाई सुरक्षा कवच दोनों को मजबूती मिलेगी।

DAC की अहम बैठक में मिली स्वीकृति

रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने जानकारी दी कि रक्षा अधिग्रहण परिषद ने राफेल बेड़े के लिए अतिरिक्त SCALP मिसाइलों और रूस से खरीदे गए S-400 सिस्टम के लिए और मिसाइलों की खरीद को मंजूरी प्रदान की है। इस निर्णय को भारतीय सशस्त्र बलों की भविष्य की जरूरतों के लिहाज से रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। परिषद की यह मंजूरी आने वाले वर्षों में भारत की वायु शक्ति को और अधिक आक्रामक तथा प्रभावी बनाएगी।

114 राफेल जेट भारत में होंगे निर्मित

सरकार की योजना के तहत 114 नए राफेल लड़ाकू विमान भारत में ही बनाए जाएंगे। रक्षा सचिव के अनुसार इन विमानों की डिलीवरी वर्ष 2028 से शुरू होगी। यह परियोजना ‘मेक इन इंडिया’ को भी बड़ा बल देगी और देश में रक्षा विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूती प्रदान करेगी। खास बात यह है कि इस नए समझौते में भारत को स्वदेशी हथियार प्रणालियों को राफेल प्लेटफॉर्म पर एकीकृत करने का पूर्ण अधिकार मिलेगा, जिससे भविष्य में स्वदेशी मिसाइलों और हथियारों का इस्तेमाल आसान होगा।

ऑपरेशन सिंदूर में दिखी SCALP की मारक क्षमता

राफेल के साथ तैनात SCALP लंबी दूरी की क्रूज मिसाइलें पहले ही अपनी सटीकता और मारक क्षमता साबित कर चुकी हैं। ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान इन मिसाइलों के उपयोग ने भारतीय वायुसेना की डीप स्ट्राइक क्षमता को दुनिया के सामने प्रदर्शित किया था। SCALP मिसाइलें दुश्मन के अहम ठिकानों को लंबी दूरी से सटीक निशाना बनाने में सक्षम मानी जाती हैं, जिससे पायलटों को अपेक्षाकृत सुरक्षित दूरी से हमला करने की सुविधा मिलती है।

S-400 से मजबूत होगा भारत का एयर डिफेंस कवच

रूस से खरीदा गया S-400 एयर डिफेंस सिस्टम पहले ही भारत की बहुस्तरीय वायु रक्षा प्रणाली का अहम हिस्सा बन चुका है। अतिरिक्त मिसाइलों की खरीद से इसकी तैनाती और प्रभावशीलता बढ़ेगी। S-400 सिस्टम लंबी दूरी तक आने वाले लड़ाकू विमान, ड्रोन और मिसाइलों को ट्रैक कर उन्हें निष्क्रिय करने में सक्षम है, जिससे देश के संवेदनशील ठिकानों को और बेहतर सुरक्षा मिलेगी।

स्वदेशी एकीकरण से बढ़ेगी रणनीतिक स्वायत्तता

नए समझौते का सबसे अहम पहलू यह है कि भारत को राफेल प्लेटफॉर्म पर अपने स्वदेशी हथियारों के एकीकरण का पूरा अधिकार मिलेगा। इससे भविष्य में ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान को गति मिलेगी और विदेशी निर्भरता में कमी आएगी। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम भारत को रक्षा क्षेत्र में तकनीकी और रणनीतिक दोनों स्तरों पर अधिक स्वायत्त बनाएगा।

इस फैसले के साथ भारत ने साफ संकेत दे दिया है कि वह अपनी वायु शक्ति और हवाई सुरक्षा को लेकर कोई समझौता नहीं करेगा। ऑपरेशन सिंदूर के अनुभवों के आधार पर लिया गया यह निर्णय आने वाले वर्षों में भारतीय सैन्य क्षमता को नई ऊंचाइयों पर ले जा सकता है।

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