भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर अभी नहीं लगेगी अंतिम मुहर! नई टैरिफ व्यवस्था लागू होने के बाद ही होगा समझौता

भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौते (ट्रेड डील) को लेकर बड़ी जानकारी सामने आई है। सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक नई टैरिफ (आयात शुल्क) व्यवस्था पूरी तरह लागू नहीं हो जाती, तब तक इस बहुप्रतीक्षित समझौते पर हस्ताक्षर नहीं किए जाएंगे। अधिकारियों के मुताबिक दोनों देशों के बीच बातचीत जारी है, लेकिन अंतिम समझौता टैरिफ संरचना स्पष्ट होने के बाद ही संभव होगा।

टैरिफ स्ट्रक्चर तय होने का इंतजार

वाणिज्य मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार भारत और अमेरिका के बीच चल रही वार्ताओं में प्रगति हो रही है, लेकिन औपचारिक रूप से समझौते पर मुहर लगाने से पहले अमेरिका द्वारा प्रस्तावित नई वैश्विक टैरिफ व्यवस्था लागू होना जरूरी है।

बताया जा रहा है कि अमेरिकी प्रशासन अंतरराष्ट्रीय व्यापार में टैरिफ की नई संरचना तैयार कर रहा है। इसी प्रक्रिया के पूरा होने के बाद ही दोनों देशों के बीच अंतिम दस्तावेज पर हस्ताक्षर किए जाएंगे।

भारत ने रखा साफ रुख

सरकारी सूत्रों का कहना है कि भारत अपने व्यापारिक हितों को ध्यान में रखते हुए ही आगे बढ़ रहा है। इसलिए नई टैरिफ व्यवस्था लागू होने तक भारत किसी भी जल्दबाजी में समझौता नहीं करना चाहता।

विशेषज्ञों का मानना है कि टैरिफ संरचना स्पष्ट होने से भारतीय निर्यातकों को यह समझने में आसानी होगी कि अमेरिका के बाजार में उनके उत्पादों पर कितना शुल्क लगेगा और किस सेक्टर को फायदा होगा।

पहले भी बन चुका है अंतरिम फ्रेमवर्क

इससे पहले दोनों देशों के बीच एक अंतरिम व्यापार ढांचा तैयार किया जा चुका है, जिसके तहत कई उत्पादों पर शुल्क में कमी का प्रस्ताव रखा गया था। इस फ्रेमवर्क का उद्देश्य दोनों देशों के व्यापारिक संबंधों को और मजबूत करना और निर्यात को बढ़ावा देना है।

अंतरिम व्यवस्था के तहत अमेरिका ने कई भारतीय उत्पादों पर टैरिफ कम करने का संकेत दिया था, जिससे कपड़ा, चमड़ा, रसायन और अन्य श्रम आधारित उद्योगों को फायदा मिलने की संभावना जताई जा रही थी।

कई सेक्टरों को मिल सकता है बड़ा फायदा

अगर भारत-अमेरिका व्यापार समझौता अंतिम रूप लेता है तो भारतीय निर्यातकों के लिए अमेरिकी बाजार में नई संभावनाएं खुल सकती हैं। विशेष रूप से टेक्सटाइल, लेदर, फुटवियर, ऑर्गेनिक केमिकल और मशीनरी जैसे क्षेत्रों को इसका बड़ा लाभ मिल सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस समझौते से भारतीय उत्पादों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ेगी और दोनों देशों के बीच व्यापारिक साझेदारी और मजबूत होगी।

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