भारत-अमेरिका डील: ट्रंप की ‘आधी टैरिफ’ वाली शर्त ने बढ़ाई टेंशन, क्या रूस से तेल नाता तोड़ पाएगा भारत? मूडीज ने दी बड़ी चेतावनी

नई दिल्ली। भारत और अमेरिका के बीच सोमवार को हुए एक ऐतिहासिक व्यापार समझौते ने वैश्विक बाजार में हलचल मचा दी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से की गई इस घोषणा ने जहां भारतीय निर्यातकों के चेहरों पर चमक ला दी है, वहीं एक ऐसी शर्त भी रख दी है जिसने सरकार और अर्थशास्त्रियों के सामने बड़ी चुनौती पेश कर दी है। ट्रंप प्रशासन ने भारतीय सामानों पर लगने वाले भारी-भरकम 50% टैरिफ को घटाकर 18% करने का वादा तो किया है, लेकिन इसके बदले भारत को रूस से कच्चा तेल खरीदना पूरी तरह बंद करना होगा।

क्या रूस से तेल का नाता तोड़ना भारत के लिए मुमकिन है?

अमर उजाला की विशेष पड़ताल और वैश्विक रेटिंग एजेंसी ‘मूडीज’ (Moody’s Ratings) की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, भारत के लिए रूस से तेल की आपूर्ति को अचानक बंद करना लगभग नामुमकिन है। मूडीज का मानना है कि यदि भारत तत्काल प्रभाव से रूसी तेल को छोड़ता है, तो इसका सीधा प्रहार देश की जीडीपी और आर्थिक विकास दर पर पड़ेगा। भारत वर्तमान में दुनिया के सबसे बड़े तेल आयातकों में शामिल है और रूस से मिलने वाला सस्ता तेल भारतीय अर्थव्यवस्था की ‘लाइफलाइन’ बना हुआ है।

बढ़ सकती है महंगाई, आम आदमी की जेब पर पड़ेगा बोझ

विशेषज्ञों का कहना है कि अगर भारत रूस का विकल्प छोड़कर अन्य देशों की ओर रुख करता है, तो वैश्विक बाजार में तेल की मांग अचानक बढ़ जाएगी। सप्लाई कम होने और डिमांड बढ़ने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें आसमान छू सकती हैं। इसका सीधा असर भारत के घरेलू बाजार पर होगा, जिससे पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ेंगे और माल ढुलाई महंगी होने से महंगाई आम आदमी की पहुंच से बाहर हो सकती है। मूडीज ने स्पष्ट किया है कि भारत के लिए अपनी ऊर्जा सप्लाई चेन को इतनी जल्दी बदलना एक बेहद जटिल और जोखिम भरा काम है।

निर्यातकों की बल्ले-बल्ले: ट्रंप ने खोला अमेरिकी बाजार का द्वार

इस समझौते का दूसरा पहलू भारतीय व्यापारियों के लिए बड़ी खुशखबरी लेकर आया है। अमेरिका भारत का सबसे बड़ा एक्सपोर्ट मार्केट है। साल 2025 के शुरुआती आंकड़ों के मुताबिक, भारत के कुल निर्यात में अमेरिका की हिस्सेदारी करीब 21% रही है। अब टैरिफ में 50% से 18% की बड़ी कटौती होने से भारतीय कपड़े, रत्न-आभूषण और इंजीनियरिंग सामान अमेरिकी बाजारों में और भी प्रतिस्पर्धी हो जाएंगे। इससे भारत के निर्यात क्षेत्र में भारी उछाल आने की उम्मीद है।

‘बाय अमेरिकन’ पर जोर: भारत अब अमेरिका से खरीदेगा ये सामान

ट्रंप की शर्तों के अनुसार, भारत ने ‘बाय अमेरिकन’ (Buy American) अभियान को अपनाने पर सहमति दी है। सरकारी सूत्रों और रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, अब भारत अमेरिका से पेट्रोलियम, अत्याधुनिक रक्षा उपकरण, इलेक्ट्रॉनिक्स, फार्मास्युटिकल्स, दूरसंचार उपकरण और नागरिक उड्डयन के लिए हवाई जहाजों की खरीद में भारी बढ़ोतरी करेगा। अमेरिकी राष्ट्रपति ने साफ कर दिया है कि व्यापारिक बाधाओं को हटाना और रूसी तेल का त्याग करना इस दोस्ती की मुख्य बुनियाद होगी।

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