
नई दिल्ली: हिंद महासागर क्षेत्र में सामरिक साझेदारी को नई धार देने के लिए भारत और नीदरलैंड्स ने समुद्री सहयोग को और मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। रॉयल नीदरलैंड्स नौसेना का अत्याधुनिक युद्धपोत ‘एचएनएलएमएस डी रूयटर (F804)’ केरल के कोच्चि तट पर पहुंचा, जहां दोनों देशों के वरिष्ठ अधिकारियों के बीच अहम बैठकें आयोजित की गईं। इस दौरे को हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सुरक्षा और सहयोग के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
कोच्चि पहुंचा अत्याधुनिक फ्रिगेट, हुआ भव्य स्वागत
डी जेवेन प्रोविन्सियन श्रेणी का यह आधुनिक फ्रिगेट जैसे ही कोच्चि बंदरगाह में दाखिल हुआ, भारतीय नौसेना के फास्ट इंटरसेप्टर क्राफ्ट ने उसे एस्कॉर्ट किया। इस दौरान भारतीय नौसैनिक बैंड की मौजूदगी में युद्धपोत और नीदरलैंड्स के अधिकारियों का औपचारिक और गर्मजोशी भरा स्वागत किया गया। यह दृश्य दोनों देशों के मजबूत होते नौसैनिक रिश्तों का प्रतीक बना।
उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने किया दौरा
इस मौके पर रॉयल नीदरलैंड्स नौसेना के उप कमांडर मेजर जनरल (रॉयल मरीन्स) रॉब डी विट भी भारत दौरे पर हैं। उनके साथ नीदरलैंड्स की राजदूत मारिसा गेरार्ड्स के नेतृत्व में एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने दक्षिणी नौसैनिक कमान, कोच्चि का दौरा किया। दोनों पक्षों ने समुद्री सुरक्षा, रणनीतिक साझेदारी और क्षेत्रीय स्थिरता पर विस्तार से चर्चा की।
ट्रेनिंग और संयुक्त अभ्यास पर जोर
बैठक के दौरान भारत और नीदरलैंड्स ने नौसैनिक सहयोग को और मजबूत करने के लिए ट्रेनिंग प्रोग्राम, शिपयार्ड विजिट और संयुक्त अभ्यास जैसे कदमों पर विशेष जोर दिया। अधिकारियों ने माना कि इस तरह के सहयोग से न केवल दोनों देशों की नौसेनाओं की क्षमता बढ़ेगी, बल्कि समुद्री सुरक्षा के क्षेत्र में भी नई मजबूती आएगी।
हिंद-प्रशांत में बढ़ेगा रणनीतिक प्रभाव
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की साझेदारी हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भारत की रणनीतिक स्थिति को और मजबूत करेगी। नीदरलैंड्स जैसे यूरोपीय देश के साथ बढ़ता नौसैनिक सहयोग वैश्विक समुद्री संतुलन में भी अहम भूमिका निभा सकता है।
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