
नई दिल्ली। भारत और पाकिस्तान के बीच द्विपक्षीय समझौते के तहत एक बार फिर दोनों देशों की जेलों में बंद नागरिकों और मछुआरों की सूची का आदान-प्रदान किया गया है। इस प्रक्रिया के दौरान भारत ने पाकिस्तान की हिरासत में बंद 13 भारतीय माने जाने वाले नागरिकों को तत्काल कांसुलर एक्सेस उपलब्ध कराने की मांग दोहराई है। भारत का कहना है कि इन नागरिकों को अब तक भारतीय अधिकारियों से मिलने की अनुमति नहीं दी गई है, जबकि अंतरराष्ट्रीय मानकों और द्विपक्षीय समझौते के तहत ऐसा किया जाना आवश्यक है।
2008 के समझौते के तहत हर साल होती है सूची का आदान-प्रदान
भारत और पाकिस्तान के बीच वर्ष 2008 में हुए कांसुलर एक्सेस समझौते के अनुसार दोनों देश हर साल 1 जनवरी और 1 जुलाई को अपनी-अपनी जेलों में बंद एक-दूसरे के नागरिकों और मछुआरों की सूची साझा करते हैं। इसी व्यवस्था के तहत इस बार भी दोनों देशों ने राजनयिक माध्यमों से संबंधित सूचियों का आदान-प्रदान किया।
भारत ने पाकिस्तान को सौंपी 439 लोगों की सूची
विदेश मंत्रालय के अनुसार भारत ने पाकिस्तान को अपनी हिरासत में मौजूद 386 पाकिस्तानी या पाकिस्तानी माने जाने वाले नागरिक कैदियों और 53 पाकिस्तानी मछुआरों की सूची सौंपी है। वहीं पाकिस्तान ने भारत को 52 भारतीय या भारतीय माने जाने वाले नागरिक कैदियों तथा 198 भारतीय मछुआरों की सूची उपलब्ध कराई है।
13 भारतीयों के लिए तत्काल कांसुलर एक्सेस की मांग
भारत ने पाकिस्तान से आग्रह किया है कि जिन 13 भारतीय माने जाने वाले नागरिक कैदियों को अब तक कांसुलर एक्सेस नहीं दिया गया है, उन्हें बिना किसी देरी के भारतीय अधिकारियों से मिलने की अनुमति दी जाए। इसके साथ ही भारत ने पाकिस्तान की जेलों में बंद सभी भारतीय नागरिकों और मछुआरों की सुरक्षा, कानूनी अधिकारों और मानवीय व्यवहार सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया है।
सजा पूरी कर चुके 188 भारतीयों की जल्द रिहाई की मांग
नई दिल्ली ने पाकिस्तान से उन 188 भारतीय नागरिकों और मछुआरों की शीघ्र रिहाई और स्वदेश वापसी सुनिश्चित करने का भी अनुरोध किया है, जो अपनी सजा पूरी कर चुके हैं। भारत का कहना है कि सजा पूरी होने के बाद ऐसे कैदियों की वापसी में अनावश्यक देरी नहीं होनी चाहिए।
2014 के बाद हजारों भारतीयों की हो चुकी है वापसी
विदेश मंत्रालय के मुताबिक, वर्ष 2014 से अब तक भारत के लगातार राजनयिक प्रयासों के चलते पाकिस्तान से 2,661 भारतीय मछुआरों और 78 भारतीय नागरिक कैदियों की स्वदेश वापसी कराई जा चुकी है। इनमें वर्ष 2023 से अब तक 500 भारतीय मछुआरे और 20 भारतीय नागरिक भी शामिल हैं, जिन्हें सुरक्षित भारत लाया गया।
सिंधु जल समझौते को लेकर बढ़े तनाव के बीच हुआ आदान-प्रदान
कैदियों की सूची का यह आदान-प्रदान ऐसे समय में हुआ है, जब भारत और पाकिस्तान के संबंध कई मुद्दों को लेकर तनावपूर्ण बने हुए हैं। सिंधु जल समझौते को लेकर दोनों देशों के बीच हाल के समय में विवाद बढ़ा है। पहलगाम हमले के बाद भारत ने इस समझौते को लेकर अपना रुख सख्त किया था और जल प्रबंधन से जुड़े कदम तेज किए हैं। इसके बाद दोनों देशों के बीच बयानबाजी भी तेज हुई है। हालांकि भारत ने स्पष्ट किया है कि आतंकवाद के मुद्दे पर उसकी नीति पहले की तरह सख्त और स्पष्ट बनी हुई है।
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