ईरान-इजरायल युद्ध के बीच भारत अलर्ट: तेल कंपनियों को उत्पादन बढ़ाने का ‘सुपर ऑर्डर’, क्या देश में गहराएगा ऊर्जा संकट?

नई दिल्ली: मिडिल ईस्ट में ईरान और इजरायल के बीच छिड़ी जंग ने दुनिया भर की धड़कनें बढ़ा दी हैं। इस युद्ध की आंच अब वैश्विक तेल बाजार तक पहुंचती दिख रही है, जिसे देखते हुए भारत सरकार ने अपनी कमर कस ली है। सरकारी सूत्रों के हवाले से बड़ी खबर सामने आ रही है कि केंद्र सरकार ने देश की सभी LPG रिफाइनरियों को तत्काल प्रभाव से उत्पादन बढ़ाने के सख्त निर्देश जारी किए हैं। सरकार का लक्ष्य स्पष्ट है—होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में तनाव के कारण यदि आपूर्ति बाधित होती है, तो देश के भीतर ईंधन की कोई किल्लत न हो।

एमआरपीएल रिफाइनरी बंद होने की अफवाहें बेदम, भंडार है लबालब

पिछले कुछ दिनों से बाजार में मंगलुरु रिफाइनरी (MRPL) के बंद होने की जो खबरें वायरल हो रही थीं, सरकार ने उन्हें पूरी तरह निराधार और गलत करार दिया है। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, एमआरपीएल रिफाइनरी में कच्चे तेल का पर्याप्त भंडार मौजूद है और वह पूरी क्षमता के साथ काम कर रही है। देशवासियों को घबराने की जरूरत नहीं है क्योंकि भारत के पास वर्तमान में होर्मुज जलडमरूमध्य में फंसे ईंधन की तुलना में कहीं अधिक विकल्प और ऊर्जा स्रोत उपलब्ध हैं।

रूस और अमेरिका से दोस्ती आई काम: भारत के पास है ‘प्लान बी’

ऊर्जा सुरक्षा के मामले में भारत अब पहले के मुकाबले कहीं अधिक मजबूत स्थिति में है। आंकड़ों की मानें तो साल 2022 में भारत अपनी जरूरत का मात्र 0.2 प्रतिशत तेल रूस से खरीदता था, लेकिन आज यह आंकड़ा बढ़कर कुल आयात का 20 प्रतिशत हो चुका है। वर्तमान में भारत रोजाना 1.04 मिलियन बैरल क्रूड रूस से ले रहा है। इसके अलावा, सरकार ने अमेरिका के साथ भी हाथ मिलाया है। सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों ने नवंबर 2025 में ही अमेरिका से 2.2 मीट्रिक टन प्रति वर्ष LPG आयात करने का बड़ा अनुबंध किया है, जिससे 2026 तक की आपूर्ति सुनिश्चित हो चुकी है।

घरेलू पेट्रोकेमिकल का होगा इस्तेमाल, आपूर्ति के बदले भौगोलिक क्षेत्र

सरकार की रणनीति केवल आयात तक सीमित नहीं है। सूत्रों का कहना है कि यदि मिडिल ईस्ट के हालात और बिगड़ते हैं, तो भारत अपने घरेलू पेट्रोकेमिकल उत्पादों का उपयोग घरेलू खपत को पूरा करने के लिए करने की योजना बना रहा है। पेट्रोलियम मंत्रालय अन्य भौगोलिक क्षेत्रों से अपनी आपूर्ति शृंखला को और मजबूत कर रहा है ताकि खाड़ी देशों पर निर्भरता को कम किया जा सके। कुल मिलाकर, तेल उत्पादों और एलपीजी के मामले में भारत की स्थिति फिलहाल काफी सुरक्षित और संतोषजनक है।

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