
वॉशिंगटन: अमेरिकी राजनीति और वैश्विक रणनीति के केंद्र में एक बार फिर बड़ा भू-राजनीतिक बदलाव देखने को मिल रहा है। डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व वाली टीम ने अब ‘ग्रेटर नॉर्थ अमेरिका स्ट्रेटजी’ के जरिए सुरक्षा और सैन्य प्रभाव का नया खाका पेश किया है। इस रणनीति को अमेरिका के युद्ध मंत्री पीट हेगसेथ ने सार्वजनिक करते हुए इसे उत्तरी गोलार्ध में सुरक्षा की नई परिभाषा बताया है।
‘ग्रेटर नॉर्थ अमेरिका’ क्या है?
फ्लोरिडा में अमेरिकी दक्षिणी कमान मुख्यालय में दिए गए बयान में हेगसेथ ने स्पष्ट किया कि यह रणनीति ग्रीनलैंड से लेकर पनामा नहर तक फैले विशाल भू-भाग को एक साझा “तत्काल सुरक्षा घेरा” मानती है। इस दायरे में भूमध्य रेखा के उत्तर में आने वाले सभी संप्रभु देश और क्षेत्र शामिल किए गए हैं। उनके अनुसार, यह क्षेत्र पारंपरिक ‘ग्लोबल साउथ’ की परिभाषा से अलग एक रणनीतिक पड़ोस बनाता है, जहां अमेरिका अपनी सैन्य और सुरक्षा उपस्थिति को और मजबूत करना चाहता है।
भूगोल बना रणनीति का आधार
हेगसेथ ने इस नई नीति की नींव भूगोल को बताया। उन्होंने अमेजन और एंडीज पर्वत जैसी प्राकृतिक सीमाओं का जिक्र करते हुए कहा कि ये बाधाएं उत्तरी और दक्षिणी सैन्य जिम्मेदारियों को अलग करती हैं। उनका तर्क है कि इन प्राकृतिक सीमाओं के उत्तर में आने वाला क्षेत्र एक साझा सुरक्षा ढांचा तैयार करता है, जहां अमेरिका और उसके सहयोगी मिलकर काम कर सकते हैं। इस बयान को यूरोप पर अप्रत्यक्ष दबाव बनाने की रणनीति के तौर पर भी देखा जा रहा है।
सहयोगी देशों से साझा जिम्मेदारी की मांग
नई रणनीति के तहत अमेरिका ने अपने सहयोगी देशों से रक्षा जिम्मेदारियों को साझा करने की अपील भी की है। हेगसेथ के मुताबिक, उत्तरी क्षेत्र की सुरक्षा के लिए अमेरिका अपनी सैन्य उपस्थिति बढ़ाएगा, लेकिन साथ ही साझेदार देशों को भी सक्रिय भूमिका निभानी होगी। दक्षिणी अटलांटिक और प्रशांत क्षेत्रों में महत्वपूर्ण संसाधनों और बुनियादी ढांचे की सुरक्षा के लिए सामूहिक प्रयासों पर जोर दिया गया है।
दक्षिणी गोलार्ध में भी बढ़ेगा सहयोग
हेगसेथ ने कहा कि भूमध्य रेखा के दक्षिण में स्थित क्षेत्रों में भी अमेरिका अपने सहयोगियों के साथ मिलकर सुरक्षा साझेदारी को मजबूत करेगा। इसका उद्देश्य रणनीतिक संसाधनों की रक्षा और वैश्विक स्थिरता को बनाए रखना है। इस कदम से पश्चिमी देशों के बीच सैन्य समन्वय और गहरा हो सकता है।
दूसरे विश्व युद्ध से जोड़ी नई रणनीति
नई नीति को ऐतिहासिक संदर्भ देते हुए हेगसेथ ने द्वितीय विश्व युद्ध का जिक्र किया। उन्होंने ‘क्वार्टर स्फीयर डिफेंस’ मॉडल को फिर से अपनाने की बात कही, जिसके तहत उस समय समुद्री मार्गों और क्षेत्रों की सुरक्षा के लिए बड़े स्तर पर सैन्य अभियान चलाए गए थे। उनके अनुसार, बदलते वैश्विक परिदृश्य में अब वैसी ही सोच को फिर से लागू करने की जरूरत है।
यूरोप की बढ़ सकती है टेंशन
विश्लेषकों का मानना है कि इस रणनीति के जरिए अमेरिका अपने सहयोगियों, खासकर यूरोपीय देशों पर रक्षा खर्च और जिम्मेदारियों को लेकर दबाव बढ़ा सकता है। यदि यह नीति लागू होती है, तो वैश्विक शक्ति संतुलन में नया मोड़ आ सकता है।
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