नई दिल्ली: मिडिल ईस्ट में ईरान और इजरायल के बीच छिड़ी भीषण जंग के कारण दुनिया भर में सप्लाई चेन बाधित होने की आशंका जताई जा रही है। विशेषकर ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ (Strait of Hormuz) के बंद होने की खबरों ने भारत में भी चिंताएं बढ़ा दी थीं। हालांकि, भारत सरकार ने इन तमाम आशंकाओं पर पूर्णविराम लगाते हुए देशवासियों को आश्वस्त किया है कि भारत के पास कच्चे तेल और एलपीजी (LPG) का पर्याप्त भंडार मौजूद है और किसी भी तरह की घबराहट की जरूरत नहीं है।
रिफाइनरियां फुल कैपेसिटी पर, बैकअप प्लान तैयार
पेट्रोलियम मंत्रालय के अनुसार, पश्चिम एशिया के तनावपूर्ण हालातों पर सरकार की पैनी नजर है। देश की सभी रिफाइनरियों को पूरी क्षमता से काम करने के निर्देश दिए गए हैं ताकि पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस की घरेलू मांग को बिना किसी रुकावट के पूरा किया जा सके। सरकार ने स्पष्ट किया है कि भारत के पास कच्चे तेल का ‘स्ट्रेटेजिक रिजर्व’ और रिफाइनरियों में पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है, जिससे आने वाले हफ्तों में आपूर्ति पर कोई असर नहीं पड़ेगा।
‘पैनिक बाइंग’ न करें, पेट्रोल पंपों पर तेल की कोई कमी नहीं
पिछले कुछ दिनों में देश के कुछ हिस्सों में अफवाहों के चलते पेट्रोल पंपों पर भारी भीड़ देखी गई। सरकार ने इसे ‘पैनिक बाइंग’ (घबराहट में खरीदारी) करार देते हुए कहा है कि कुछ असामाजिक तत्वों द्वारा फैलाई जा रही गलत सूचनाओं के कारण लोग जरूरत से ज्यादा स्टॉक कर रहे हैं। सरकार ने दोहराया है कि सभी रिटेल आउटलेट्स पर ईंधन की उपलब्धता सामान्य है और तेल कंपनियों के पास डिपो में भरपूर स्टॉक जमा है।
PNG और CNG उपभोक्ताओं के लिए ‘ग्रीन सिग्नल’
गैस आपूर्ति को लेकर सरकार ने प्राथमिकताएं तय कर दी हैं। घरेलू पीएनजी (D-PNG) और सीएनजी (CNG) परिवहन को 100% आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है। इसके साथ ही, होटल और रेस्टोरेंट जैसे वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों को सलाह दी गई है कि वे एलपीजी के बजाय पीएनजी कनेक्शन को प्राथमिकता दें। IGL, GAIL और BPCL जैसी कंपनियां नए पीएनजी कनेक्शन लेने वालों को विशेष प्रोत्साहन और छूट भी दे रही हैं।
औद्योगिक क्षेत्रों के लिए खास रणनीति
इंडस्ट्रियल और कमर्शियल सेक्टर के लिए आपूर्ति को उनकी औसत खपत के 80% पर बनाए रखा गया है। सरकार ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से अनुरोध किया है कि वे गैस नेटवर्क विस्तार (CGD) से जुड़ी मंजूरियों में तेजी लाएं, ताकि भविष्य में किसी भी बाहरी संकट का असर देश की अर्थव्यवस्था पर न पड़े।
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