
France Pinaka Rocket System News: भारतीय रक्षा उद्योग के लिए एक अहम माने जा रहे पिनाका मल्टी-बैरल रॉकेट लॉन्चर (MBRL) सिस्टम को लेकर फ्रांस ने बड़ा फैसला लिया है। कभी इस स्वदेशी हथियार प्रणाली में गहरी दिलचस्पी दिखाने वाला फ्रांस अब इसकी खरीद से पीछे हट गया है। फ्रांसीसी सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि वह अपनी अगली पीढ़ी की मल्टीपल लॉन्च रॉकेट सिस्टम (MLRS) आवश्यकता के लिए घरेलू रक्षा उद्योग पर ही भरोसा करेगी। इस फैसले को भारत की रक्षा निर्यात महत्वाकांक्षाओं के लिए एक महत्वपूर्ण झटका माना जा रहा है।
पिनाका को लेकर पहले दिखाया था उत्साह
कुछ समय पहले तक फ्रांस की सैन्य नेतृत्व टीम भारतीय रक्षा तकनीक में खास रुचि दिखा रही थी। फ्रांसीसी सेना प्रमुख ने भारत की लंबी दूरी की आर्टिलरी क्षमता, लॉइटरिंग म्यूनिशन और काउंटर-ड्रोन सिस्टम की सराहना की थी। इसी क्रम में पिनाका रॉकेट सिस्टम को भी संभावित विकल्प के रूप में देखा जा रहा था।
हालांकि, अब पेरिस ने अपनी रक्षा जरूरतों के लिए विदेशी विकल्पों की बजाय स्वदेशी समाधान को प्राथमिकता देने का निर्णय लिया है। इससे पिनाका सौदे की संभावनाएं लगभग समाप्त हो गई हैं।
घरेलू रक्षा उद्योग को बढ़ावा देने की रणनीति
फ्रांस के 2024-2030 मिलिट्री प्रोग्रामिंग लॉ (LPM) के तहत रक्षा खरीद नीति में स्थानीय निर्माण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है। फ्रांसीसी रक्षा खरीद एजेंसी (DGA) का जोर ऐसे सिस्टम विकसित करने पर है जो पूरी तरह फ्रांस में निर्मित हों या जिन पर उसका पूर्ण तकनीकी नियंत्रण हो।
विशेषज्ञों के अनुसार, फ्रांस अपने पुराने अमेरिकी मूल के M270 LRU रॉकेट सिस्टम को बदलने की तैयारी कर रहा है। इन सिस्टमों का एक बड़ा हिस्सा यूक्रेन को सैन्य सहायता के रूप में दिया जा चुका है, जिसके कारण फ्रांसीसी सेना के पास सीमित संख्या में ही परिचालन यूनिट बची हैं।
तकनीकी चुनौतियां भी बनीं बड़ी वजह
सूत्रों के मुताबिक, पिनाका सिस्टम को फ्रांस और नाटो के मौजूदा नेटवर्क-केंद्रित युद्ध ढांचे के साथ पूरी तरह एकीकृत करने में तकनीकी चुनौतियां सामने आ रही थीं। विशेष रूप से NATO के टैक्टिकल डेटा-लिंक सिस्टम जैसे Link-16 तथा यूरोपीय कोऑपरेटिव टारगेटिंग फ्रेमवर्क के साथ सुरक्षित और निर्बाध कनेक्टिविटी को लेकर कई सवाल बने हुए थे।
रक्षा विश्लेषकों का मानना है कि आधुनिक युद्ध में केवल हथियार प्रणाली की मारक क्षमता ही नहीं, बल्कि उसका मौजूदा कमांड, कंट्रोल और कम्युनिकेशन नेटवर्क के साथ सहज तालमेल भी बेहद महत्वपूर्ण होता है। यही पहलू पिनाका के लिए चुनौती बन गया।
भारत के लिए क्या हैं इसके मायने?
फ्रांस का यह फैसला निश्चित रूप से भारत के रक्षा निर्यात अभियान के लिए एक झटका माना जा रहा है। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि इससे पिनाका सिस्टम की क्षमताओं पर सवाल नहीं उठता। भारतीय सेना में सफलतापूर्वक तैनात यह रॉकेट सिस्टम पहले ही अपनी विश्वसनीयता साबित कर चुका है और कई अन्य देशों की रुचि भी इसमें बनी हुई है।
भारत पिछले कुछ वर्षों में रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता के साथ-साथ वैश्विक निर्यातक बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ा है। ऐसे में फ्रांस का निर्णय चुनौती जरूर है, लेकिन इससे भारतीय रक्षा उत्पादों की अंतरराष्ट्रीय संभावनाएं समाप्त नहीं होतीं।
रक्षा निर्यात के नए बाजारों पर भारत की नजर
विशेषज्ञों का मानना है कि यूरोप में भले ही यह अवसर हाथ से निकल गया हो, लेकिन एशिया, अफ्रीका, लैटिन अमेरिका और मध्य-पूर्व के कई देश किफायती एवं प्रभावी रक्षा प्रणालियों की तलाश में हैं। पिनाका जैसे स्वदेशी सिस्टम इन बाजारों में भारत की मजबूत उपस्थिति दर्ज करा सकते हैं।
भारत सरकार और रक्षा कंपनियां अब ऐसे देशों पर अधिक फोकस कर सकती हैं जहां पश्चिमी रक्षा प्रणालियों की तुलना में कम लागत वाले लेकिन प्रभावशाली विकल्पों की मांग तेजी से बढ़ रही है।
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