भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर ग्रहण: US सुप्रीम कोर्ट के फैसले से बिगड़ा समीकरण, मुख्य वार्ताकार का वाशिंगटन दौरा टला; अब क्या होगा?

नई दिल्ली: अंतरराष्ट्रीय व्यापार जगत से इस वक्त की सबसे बड़ी खबर सामने आ रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगाए गए ‘रेसिप्रोकल टैरिफ’ (पारस्परिक शुल्क) को वहां की सुप्रीम कोर्ट द्वारा अमान्य घोषित किए जाने के बाद भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता अधर में लटक गई है। इस कानूनी उथल-पुथल और वैश्विक अनिश्चितता के बीच भारत के मुख्य वार्ताकार दर्पण जैन का प्रस्तावित अमेरिका दौरा फिलहाल टाल दिया गया है।

ऐन वक्त पर क्यों टला वाशिंगटन दौरा?

वाणिज्य मंत्रालय के उच्च पदस्थ सूत्रों के मुताबिक, भारत के मुख्य वार्ताकार और उनकी टीम को सोमवार को वाशिंगटन पहुंचना था। यहाँ दोनों देशों के बीच व्यापार समझौते के कानूनी मसौदे (Legal Text) को अंतिम रूप दिया जाना था। हालांकि, अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के शुक्रवार के फैसले ने पूरे समीकरण बदल दिए हैं। दोनों देशों ने आपसी सहमति से तय किया है कि वार्ता को तब तक के लिए आगे बढ़ाया जाए जब तक कि इस अदालती फैसले के असर का पूरी तरह आकलन न कर लिया जाए।

ट्रंप के ‘टैरिफ वॉर’ को लगा कानूनी झटका

दरअसल, अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसले में राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा ‘इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट’ (IEEPA) के तहत लगाए गए शुल्कों को अवैध करार दिया है। कोर्ट का कहना है कि राष्ट्रपति बिना कांग्रेस की मंजूरी के इस तरह के व्यापक टैरिफ नहीं लगा सकते। इस फैसले के तुरंत बाद ट्रंप ने पलटवार करते हुए ‘ट्रेड एक्ट 1974’ की धारा 122 के तहत 15% वैश्विक आयात अधिभार (Surcharge) लगाने का संकेत दिया है। इसी कानूनी खींचतान ने भारत के साथ होने वाली डील पर अनिश्चितता के बादल गहरा दिए हैं।

भारत की रणनीति: ‘देखो और इंतजार करो’

वाणिज्य मंत्रालय ने आधिकारिक बयान में कहा है कि भारत सरकार अमेरिकी घटनाक्रम पर बारीकी से नजर रख रही है। मंत्रालय के अनुसार, “हम इस फैसले के कानूनी और व्यापारिक पहलुओं का अध्ययन कर रहे हैं। वार्ता के लिए अगली तारीख दोनों देशों की सुविधा और परिस्थितियों के मूल्यांकन के बाद तय की जाएगी।” इससे पहले वाणिज्य सचिव ने मार्च 2026 तक इस डील को पूरा करने का लक्ष्य रखा था, जो अब मुश्किल नजर आ रहा है।

विपक्ष हमलावर: खरगे ने बताया ‘ट्रैप डील’

इधर, अमेरिका में कानूनी पेच फंसते ही देश में सियासत भी गरमा गई है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने सोशल मीडिया (X) पर सवाल उठाया कि मोदी सरकार ने टैरिफ पर फैसले का इंतजार क्यों नहीं किया? खरगे ने आरोप लगाया कि यह एक ‘ट्रैप डील’ है जिसमें भारत ने रूसी तेल पर रोक और अमेरिकी कृषि उत्पादों के लिए बाजार खोलने जैसी बड़ी रियायतें दे दी हैं। उन्होंने पीएम मोदी से इस पर देश को सच बताने की मांग की है।

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