
भारतीय निर्वाचन आयोग (ECI) द्वारा मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया पर जारी आधिकारिक स्पष्टीकरण के बाद भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने विपक्ष पर तीखा हमला बोला है। भाजपा ने कहा कि आयोग के इस बयान ने यह पूरी तरह साफ कर दिया है कि वोटर लिस्ट में बदलाव से जुड़े सभी फैसले मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार और दोनों चुनाव आयुक्तों (सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी) की पूर्ण सहमति से लिए गए थे। भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता संबित पात्रा ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि विपक्षी दलों द्वारा चुनाव आयोग की साख को नुकसान पहुंचाने और इसके भीतर आंतरिक मतभेद की झूठी खबरें फैलाने की जो साजिश रची गई थी, उसकी पोल अब पूरी तरह से खुल चुकी है।
31 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में सर्वसम्मति से लागू हुआ SIR
चुनाव आयोग ने अपने बयान में स्पष्ट किया कि हाल के महीनों में देश भर में चलाए गए SIR अभियान के तहत बिहार, पश्चिम बंगाल समेत 31 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए जो आदेश जारी किए गए थे, वे सभी आयोग की सर्वसम्मत मंजूरी से ही जारी हुए थे। आयोग ने जानकारी दी कि 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए SIR का शेड्यूल 27 अक्टूबर 2025 को तथा अन्य 19 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के लिए 14 मई 2026 को सर्वसम्मति से पास किया गया था। तीसरे चरण के शेष 12 राज्यों में प्रक्रिया पूरी होने और अंतिम प्रकाशन के बाद ही नए मतदाताओं का सटीक आंकड़ा सामने आ सकेगा।
सुप्रीम कोर्ट की मुहर से आयोग के फैसले को मिली वैधता
भाजपा ने ध्यान दिलाया कि चुनाव आयोग द्वारा अपनाई गई इस पूरी पारदर्शी प्रक्रिया को देश की सर्वोच्च अदालत से भी हरी झंडी मिल चुकी है। भारत के सुप्रीम कोर्ट ने भी 27 मई 2026 को दिए अपने आदेश में SIR प्रक्रिया और आयोग द्वारा अपनाए गए कानूनी तरीकों को बिल्कुल सही ठहराया था। इसके बावजूद, विपक्षी दल चुनाव आयुक्तों के बीच 14 बार आपत्ति जताने जैसी मनगढ़ंत अफवाहें फैलाकर संवैधानिक संस्थाओं की स्वायत्तता पर सवाल उठाने का लगातार प्रयास कर रहे हैं। भाजपा का दावा है कि आयोग के इस आधिकारिक जवाब के बाद अब तमाम बेबुनियाद आरोपों और राजनीतिक भ्रम का अंत हो चुका है।
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