
अयोध्या के बहुचर्चित श्री रामजन्मभूमि मंदिर दान-चढ़ावा चोरी प्रकरण में पुलिस ने विशेष जांच के बाद चार्जशीट दाखिल कर दी है। चार्जशीट में पुलिस ने 8 मुख्य आरोपियों के बैंक खातों, जमीन, मकान, महंगी गाड़ियों, गहनों और व्यक्तिगत खर्चों का पूरा फॉरेंसिक और वित्तीय विश्लेषण शामिल किया है। जांच रिपोर्ट के अनुसार, मंदिर परिसर के गणना कक्ष (Counting Room) में तैनात इन कर्मचारियों ने श्रद्धालुओं द्वारा श्रद्धा से चढ़ाए गए दान की रकम पर हाथ साफ किया और उस अवैध कमाई को खुद के साथ-साथ अपने परिजनों व करीबियों के खातों और अचल संपत्तियों में खपाया।
पिता के नाम पर खरीदा 55 लाख का मकान, 25 लाख दिए कैश
चार्जशीट में आरोपी अनुकल्प मिश्रा की वित्तीय गतिविधियों का परत-दर-परत ब्योरा दिया गया है। पुलिस का दावा है कि अनुकल्प ने चढ़ावे की चोरी की रकम से अयोध्या के कौशलपुरी इलाके में अपने पिता रवींद्र कुमार मिश्रा के नाम पर 55 लाख रुपये का मकान वंदना द्विवेदी नामक महिला से खरीदा। इस खरीद के लिए 29.50 लाख रुपये बैंक ट्रांजैक्शन और 25 लाख रुपये नकद लखनऊ में दिए गए थे।
वेतन महज 3.13 लाख, लेकिन कार और भागवत कथा पर लुटाए लाखों
आरोपी अनुकल्प के बैंक खातों के विश्लेषण से यह हैरान कर देने वाली बात सामने आई है कि पूरी सेवा अवधि के दौरान उसे वेतन के रूप में केवल 3.13 लाख रुपये ही मिले थे। इसके बावजूद उसने:
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मकान के लिए ट्रांजैक्शन: अपने खाते से 12 लाख रुपये पिता को भेजे। इसके अलावा 17.50 लाख रुपये रिश्तेदारों (रामेंद्र, कौशल और राजीव तिवारी) को नकद देकर उनके जरिए बैंक खाते में जमा कराए।
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कार खरीद: एक नई स्विफ्ट डिजायर कार खरीदने में 3 लाख रुपये नकद जमा किए।
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धार्मिक आयोजन: अपने घर में भागवत कथा का भव्य आयोजन कराकर उसमें 7.33 लाख रुपये नकद खर्च किए।
पुलिस की विस्तृत चार्जशीट से साफ जाहिर होता है कि आरोपियों ने राम मंदिर के दान की पवित्र राशि का इस्तेमाल निजी ऐशो-आराम, शादियों, जमीनों की रजिस्ट्री और लग्जरी लाइफस्टाइल में किया, जिसकी हर एक एंट्री का हिसाब अब अदालत के सामने पेश कर दिया गया है।
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