
उत्तर प्रदेश की राजनीति और धार्मिक गलियारों में बड़ा विवाद उभर आया है क्योंकि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा विधानसभा में दिए गए बयान पर शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। स्वामी ने CM के बयान को संत के अनुरूप नहीं बताया और इसे “गुंडों जैसी भाषा” करार देते हुए मुख्यमंत्री को आत्ममंथन करने की सलाह दी है। विवाद इस क़दर बढ़ चुका है कि उन्होंने राज्यपाल से हस्तक्षेप की अपील भी की है।
🗣️ क्या कहा स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने आरोप लगाया कि योगी आदित्यनाथ उल्टी धारा बहा रहे हैं और नाथ परंपरा के विचारों को कलंकित कर रहे हैं। उन्होंने याद दिलाया कि मुख्यमंत्री ने पहले ही अपने सोशल मीडिया पर उन्हें शंकराचार्य कहकर संबोधित किया था, लेकिन अब उसी संबोधन पर आपत्ति जता रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री की भाषा संतों के अनुरूप नहीं बल्कि गुंडे जैसी प्रतीत होती है, जिस पर उन्हें शर्म आनी चाहिए।
स्वामी ने यह आरोप भी लगाया कि मुख्यमंत्री के ऊपर दर्ज मुकदमों को हटवाना कानून का सम्मान नहीं कहलाता और अगर राज्यपाल इस मामले में कार्रवाई नहीं करती हैं तो यह संदेश जाएगा कि प्रदेश में कानून प्रणाली कमजोर है।
🏛️ योगी आदित्यनाथ के विधानसभा बयान का बयानबाज़ार प्रभाव
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विधानसभा में कहा था कि कोई भी व्यक्ति ‘शंकराचार्य’ लिखकर किसी भी धार्मिक पीठ का प्रतिनिधित्व नहीं कर सकता, यदि वह नियमों और मर्यादाओं का पालन नहीं करता। उन्होंने यह भी कहा कि माघ मेले में नियमों का उल्लंघन और बिना अनुमति के किसी मार्ग से प्रवेश करना संत की मर्यादा और राज्य की कानून व्यवस्था दोनों के खिलाफ है।
योगी ने यह भी जोड़ा कि कानून सभी के लिए समान है और किसी को भी नियमों का उल्लंघन करने की अनुमति नहीं दी जा सकती — चाहे वह शंकराचार्य कहलाए या कोई और।
📌 प्रमुख बिंदु:
• स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने योगी पर तीखा हमला किया, उन्हें संतों की गरिमा का अपमान करने का आरोप लगाया।
• उन्होंने राज्यपाल से मामले में हस्तक्षेप करने का आग्रह किया।
• योगी आदित्यनाथ ने नियमों और मर्यादाओं के पालन पर जोर दिया और कहा कि कोई भी व्यक्ति कानून से ऊपर नहीं है।
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