नई दिल्ली। महिला आरक्षण और परिसीमन को लेकर देश की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। संसद के आगामी मानसून सत्र से पहले इस मुद्दे पर सियासी बयानबाजी भी बढ़ने लगी है। इसी बीच कांग्रेस ने केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि महिला आरक्षण को लागू करने की बात सिर्फ एक राजनीतिक रणनीति का हिस्सा है, जबकि इसके पीछे का वास्तविक उद्देश्य देश की आरक्षण व्यवस्था को कमजोर करना है।
दो-तिहाई बहुमत के समीकरण पर बढ़ी चर्चा
हाल के राजनीतिक घटनाक्रमों के बाद राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) की संसदीय ताकत में बढ़ोतरी की चर्चा जोरों पर है। विभिन्न क्षेत्रीय दलों में हुए राजनीतिक बदलावों के बाद यह अटकलें लगाई जा रही हैं कि यदि सरकार संसद में दो-तिहाई बहुमत के करीब पहुंचती है तो वह महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े विधेयकों को आगे बढ़ा सकती है।
इसी संभावना को लेकर विपक्षी दलों ने भी सरकार की मंशा पर सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं। कांग्रेस का कहना है कि सरकार महिला सशक्तिकरण के नाम पर राजनीतिक समर्थन जुटाने का प्रयास कर रही है।
कांग्रेस ने सरकार की नीयत पर उठाए सवाल
कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि महिला आरक्षण लागू करने के नाम पर सरकार व्यापक संवैधानिक बदलावों की जमीन तैयार कर रही है। पार्टी का दावा है कि इस पूरी कवायद का अंतिम लक्ष्य सामाजिक न्याय और आरक्षण से जुड़े मौजूदा ढांचे को प्रभावित करना हो सकता है।
कांग्रेस ने कहा कि भाजपा महिला आरक्षण को एक बड़े राजनीतिक एजेंडे के तौर पर पेश कर रही है, लेकिन इसके पीछे छिपे संभावित प्रभावों पर देश को सतर्क रहने की जरूरत है। पार्टी ने सरकार से इस मुद्दे पर अपनी स्पष्ट मंशा सार्वजनिक करने की मांग भी की है।
पहले भी पेश हो चुके हैं संबंधित विधेयक
गौरतलब है कि केंद्र सरकार ने इसी वर्ष अप्रैल में लोकसभा में संविधान (131वां संशोधन) विधेयक और परिसीमन विधेयक पेश किया था। इन विधेयकों का उद्देश्य महिला आरक्षण को लागू करने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाना और उससे जुड़े परिसीमन संबंधी प्रावधानों को कानूनी आधार देना बताया गया था।
हालांकि, इन प्रस्तावों को लेकर राजनीतिक दलों के बीच मतभेद बने हुए हैं। विपक्ष का एक वर्ग जहां इसे राजनीतिक लाभ हासिल करने का प्रयास मान रहा है, वहीं सरकार इसे महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी बढ़ाने की दिशा में ऐतिहासिक कदम बता रही है।
मानसून सत्र में बढ़ सकती है राजनीतिक गर्मी
संसद का मानसून सत्र नजदीक आते ही महिला आरक्षण और परिसीमन का मुद्दा फिर से राष्ट्रीय बहस के केंद्र में आ गया है। यदि सरकार इस विषय पर आगे बढ़ती है तो संसद के भीतर और बाहर दोनों जगह तीखी राजनीतिक टकराहट देखने को मिल सकती है।
फिलहाल कांग्रेस के आरोपों और भाजपा की संभावित रणनीति को लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर जारी है। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े मुद्दों पर सरकार क्या कदम उठाती है और विपक्ष उसका किस तरह जवाब देता है।
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