US-Iran Deal में पाकिस्तान की बढ़ती भूमिका पर कांग्रेस का हमला, बोली- ट्रंप को खुश करने की नीति देशहित के खिलाफ

नई दिल्ली। अमेरिका और ईरान के बीच हुए नए समझौते में पाकिस्तान की अहम भूमिका को लेकर कांग्रेस ने केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तीखा हमला बोला है। पार्टी का कहना है कि इस घटनाक्रम ने भारत की विदेश नीति पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रति प्रधानमंत्री मोदी का लगातार झुकाव और उन्हें संतुष्ट करने की कोशिश देश के हितों के अनुरूप नहीं है।

पाकिस्तान की बढ़ती वैश्विक भूमिका पर कांग्रेस की चिंता

कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने गुरुवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच हुआ 14 सूत्रीय समझौता अब औपचारिक रूप से सार्वजनिक किया जा चुका है। उन्होंने कहा कि इस समझौते को “इस्लामाबाद मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (एमओयू)” नाम दिया जाना अपने आप में एक बड़ा संकेत है।

उनके मुताबिक, यह घटनाक्रम दर्शाता है कि पाकिस्तान की क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्वीकार्यता तथा प्रभाव में बढ़ोतरी हुई है। कांग्रेस का दावा है कि यह स्थिति भारत की मौजूदा विदेश नीति के लिए एक बड़ा झटका मानी जा सकती है।

मोदी सरकार की विदेश नीति पर उठाए सवाल

जयराम रमेश ने कहा कि हाल के अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों को देखते हुए भारत की कूटनीतिक स्थिति का गंभीरता से आकलन किए जाने की जरूरत है। उनका आरोप है कि प्रधानमंत्री मोदी द्वारा अमेरिकी नेतृत्व के साथ अत्यधिक निकटता बनाए रखने की नीति अपेक्षित परिणाम देने में सफल नहीं रही है।

कांग्रेस नेता ने कहा कि यदि पाकिस्तान अमेरिका और ईरान जैसे महत्वपूर्ण देशों के बीच मध्यस्थ या प्रभावशाली भूमिका निभाने में सफल हो रहा है, तो यह भारत के लिए चिंता का विषय है और सरकार को इस पर जवाब देना चाहिए।

ईरान को मिलीं कई रणनीतिक उपलब्धियां

कांग्रेस का कहना है कि इस समझौते से ईरान को कई महत्वपूर्ण कूटनीतिक और रणनीतिक लाभ प्राप्त हुए हैं। पार्टी के अनुसार, समझौते के विभिन्न बिंदु ईरान की अंतरराष्ट्रीय स्थिति को मजबूत करने वाले साबित हो सकते हैं।

जयराम रमेश ने यह भी दावा किया कि इस समझौते के राजनीतिक प्रभावों को देखते हुए इसे इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के लिए एक कूटनीतिक झटका माना जा सकता है। उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया की बदलती परिस्थितियों में कई नए समीकरण उभरकर सामने आ रहे हैं।

अंतरराष्ट्रीय राजनीति में नए समीकरणों की चर्चा

अमेरिका, ईरान और पाकिस्तान से जुड़े इस समझौते ने दक्षिण एशिया और पश्चिम एशिया की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। कांग्रेस का मानना है कि पाकिस्तान की बढ़ती सक्रियता और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उसकी मौजूदगी को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। वहीं, केंद्र सरकार की विदेश नीति को लेकर विपक्ष लगातार सवाल उठा रहा है।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आने वाले समय में इस समझौते के व्यापक भू-राजनीतिक प्रभाव देखने को मिल सकते हैं, जिनका असर क्षेत्रीय शक्ति संतुलन पर भी पड़ सकता है।

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