CM योगी का मंच से मज़ाकिया तंज: ‘रवि किशन तो नाच-गाकर कमा लेंगे, कालीबाड़ी के बाबा का क्या होगा?’

उत्तर प्रदेश की सियासत में एक बार फिर बयानबाजी ने हलचल तेज कर दी है। योगी आदित्यनाथ ने गोरखपुर में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान मंच से ऐसा तंज कसा कि राजनीतिक गलियारों में चर्चा शुरू हो गई। मुख्यमंत्री ने मुस्कुराते हुए कहा कि गोरखपुर के सांसद तो अपने हुनर से कहीं भी कमा लेंगे, लेकिन “कालीबाड़ी के बाबा” का क्या होगा? उनके इस बयान पर कार्यक्रम स्थल पर मौजूद लोगों ने ठहाके लगाए, वहीं विपक्ष ने इसे अलग नजरिए से देखना शुरू कर दिया है।

गोरखपुर में मंच से आई चुटकी

कार्यक्रम में मौजूद जनसमूह को संबोधित करते हुए सीएम ने विकास कार्यों और जनहित योजनाओं का जिक्र किया। इसी दौरान उन्होंने हल्के-फुल्के अंदाज में रवि किशन का नाम लेते हुए कहा कि वह तो नाच-गाकर अपनी जीविका चला सकते हैं, लेकिन कालीबाड़ी के बाबा के सामने रोजी-रोटी की चुनौती खड़ी हो सकती है। इस टिप्पणी को समर्थकों ने मजाकिया अंदाज माना, जबकि राजनीतिक विश्लेषक इसे स्थानीय सियासी समीकरणों से जोड़कर देख रहे हैं।

राजनीतिक संदेश या हल्का व्यंग्य?

मुख्यमंत्री का यह बयान ऐसे समय आया है जब गोरखपुर में विकास परियोजनाओं और धार्मिक स्थलों के संरक्षण को लेकर चर्चाएं चल रही हैं। मंच से दिए गए इस बयान को कुछ लोग राजनीतिक संदेश के तौर पर भी देख रहे हैं। हालांकि सीएम का लहजा हल्का और हंसमुख था, जिससे साफ था कि वह माहौल को सहज बनाए रखना चाहते थे।

विपक्ष ने साधा निशाना

बयान सामने आते ही विपक्षी दलों ने इसे मुद्दा बनाने की कोशिश की। उनका कहना है कि मुख्यमंत्री को जनप्रतिनिधियों और धार्मिक व्यक्तित्वों के बारे में इस तरह की टिप्पणी से बचना चाहिए। वहीं सत्तारूढ़ दल के नेताओं का तर्क है कि यह महज एक हंसी-मजाक था, जिसे बेवजह राजनीतिक रंग दिया जा रहा है।

पहले भी चर्चा में रहे हैं बयान

यह पहला मौका नहीं है जब उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अपने बयानों को लेकर सुर्खियों में आए हों। इससे पहले भी कई मंचों से उनके बयान राजनीतिक बहस का केंद्र बन चुके हैं। गोरखपुर से सांसद रवि किशन फिल्मी दुनिया से राजनीति में आए हैं और अपनी अलग पहचान रखते हैं। ऐसे में मुख्यमंत्री की टिप्पणी को उनके फिल्मी करियर से जोड़कर देखा जा रहा है।

सियासी हलकों में तेज हुई चर्चा

स्थानीय स्तर पर इस बयान के बाद समर्थक और विरोधी दोनों ही अपने-अपने तर्क दे रहे हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस तरह के बयान कभी-कभी जनसभा के माहौल को हल्का करने के लिए दिए जाते हैं, लेकिन उनका असर दूर तक जाता है। फिलहाल बयान को लेकर सोशल मीडिया पर भी बहस जारी है और राजनीतिक तापमान बढ़ता नजर आ रहा है।

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