
सुप्रीम कोर्ट ने CJP की ओर से प्रस्तावित मार्च पर रोक लगाने की मांग वाली याचिका पर हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया है। मामले की सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत ने कहा कि प्रशासन और संबंधित अधिकारियों से कानून-व्यवस्था बनाए रखने की पूरी उम्मीद की जाती है। अदालत की इस टिप्पणी के बाद प्रस्तावित मार्च को लेकर चल रही कानूनी कवायद फिलहाल किसी रोक तक नहीं पहुंच सकी है।
मार्च रोकने के लिए सुप्रीम कोर्ट में दायर हुई थी याचिका
CJP के प्रस्तावित मार्च को रोकने की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया गया था। याचिका में मार्च के दौरान संभावित स्थिति और कानून-व्यवस्था से जुड़े पहलुओं को देखते हुए न्यायालय से हस्तक्षेप की मांग की गई थी। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इस स्तर पर मार्च पर रोक लगाने का आदेश देने से इनकार कर दिया।
CJI सूर्यकांत ने कानून-व्यवस्था को लेकर क्या कहा?
सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने स्पष्ट किया कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना संबंधित प्रशासन और अधिकारियों की जिम्मेदारी है। CJI ने कहा कि अधिकारियों से उम्मीद की जाती है कि वे स्थिति को संभालने के लिए जरूरी कदम उठाएंगे और कानून-व्यवस्था कायम रखेंगे।
सुप्रीम कोर्ट के रुख से क्या साफ हुआ?
अदालत के रुख से फिलहाल इतना स्पष्ट है कि प्रस्तावित मार्च को रोकने के लिए न्यायिक हस्तक्षेप नहीं किया गया है। साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने कानून-व्यवस्था से जुड़े मुद्दे को प्रशासनिक अधिकारियों की जिम्मेदारी के तौर पर देखा है। ऐसे में अब मार्च को लेकर आगे की स्थिति पर संबंधित प्रशासन की भूमिका अहम होगी।
प्रस्तावित मार्च को लेकर क्यों बढ़ी हलचल?
CJP के प्रस्तावित मार्च को लेकर पहले से चर्चा बनी हुई थी। इसे रोकने की मांग सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचने के बाद मामला और महत्वपूर्ण हो गया। अब शीर्ष अदालत द्वारा रोक लगाने से इनकार किए जाने और अधिकारियों से कानून-व्यवस्था बनाए रखने की उम्मीद जताए जाने के बाद इस घटनाक्रम पर सभी की नजर बनी हुई है।
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