
बीजिंग। ईरान में जारी तनाव के बीच चीन ने अमेरिका और इजरायल को कड़ा संदेश देते हुए साफ कहा है कि तेहरान में सत्ता परिवर्तन की कोशिशें स्वीकार्य नहीं हैं। चीन ने चेतावनी दी है कि किसी भी देश को ईरान के आंतरिक मामलों में दखल देने का अधिकार नहीं है और सैन्य कार्रवाई तुरंत रोकी जानी चाहिए। बीजिंग का कहना है कि दुनिया ताकत के कानून पर नहीं चल सकती और क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखना जरूरी है।
ईरान में सत्ता परिवर्तन के प्रयासों पर चीन का सख्त रुख
चीन ने ईरान पर हो रहे हमलों और वहां शासन बदलने की चर्चाओं को लेकर अमेरिका और इजरायल को अप्रत्यक्ष रूप से घेरा है। चीनी नेतृत्व का कहना है कि तेहरान में सरकार बदलने की कोई भी योजना वहां की जनता की इच्छा के खिलाफ है और ऐसे प्रयास सफल नहीं होंगे।
चीन ने यह भी कहा कि किसी भी बाहरी ताकत द्वारा दूसरे देश के राजनीतिक ढांचे को बदलने की कोशिश उसकी संप्रभुता के खिलाफ है। इसलिए सभी देशों को अंतरराष्ट्रीय नियमों और राष्ट्रों की स्वतंत्रता का सम्मान करना चाहिए।
“ईरान की जनता खुद तय करेगी अपना भविष्य”
चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने बीजिंग में मीडिया से बातचीत के दौरान कहा कि ईरान के लोगों की भावनाओं को नजरअंदाज करके किसी तरह का शासन परिवर्तन थोपना संभव नहीं है।
उन्होंने कहा कि ईरान सहित अरब और दुनिया के सभी देशों की स्वतंत्रता और संप्रभुता का सम्मान होना चाहिए। उनके मुताबिक हथियारों की ताकत से किसी भी विवाद का समाधान नहीं होता बल्कि इससे नफरत और अस्थिरता बढ़ती है।
मध्य-पूर्व के मुद्दे क्षेत्र के देश ही सुलझाएं
वांग यी ने कहा कि मध्य-पूर्व के देश अपने क्षेत्र के असली मालिक हैं और उन्हें अपने भविष्य से जुड़े फैसले खुद लेने चाहिए। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की कि क्षेत्रीय मामलों में अनावश्यक हस्तक्षेप से बचा जाए।
चीन का कहना है कि अगर किसी भी विवाद को सुलझाना है तो उसका रास्ता सैन्य कार्रवाई नहीं बल्कि बातचीत और कूटनीति है।
“दुनिया में जंगलराज नहीं चल सकता”
चीन के विदेश मंत्री ने बिना किसी देश का नाम लिए कहा कि दुनिया को फिर से “जंगल के कानून” की तरफ नहीं लौटना चाहिए, जहां ताकतवर देश अपनी मर्जी चलाते हैं। उन्होंने सभी पक्षों से अपील की कि मतभेदों को संवाद के जरिए सुलझाया जाए और जल्द से जल्द बातचीत की टेबल पर लौटा जाए।
उन्होंने यह भी कहा कि चीन क्षेत्र में शांति बहाली और तनाव कम करने के प्रयासों में रचनात्मक भूमिका निभाने के लिए तैयार है।
हमलों के बाद चीन ने जताई कड़ी नाराजगी
ईरान पर अमेरिका और इजरायल की सैन्य कार्रवाई के बाद चीन उन देशों में शामिल है जिन्होंने इसकी खुलकर आलोचना की है। बीजिंग ने ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई को निशाना बनाए जाने की निंदा की और तेहरान में हो रही बमबारी पर भी कड़ा विरोध जताया है।
चीन का मानना है कि इस तरह की सैन्य कार्रवाइयों से पूरे मध्य-पूर्व में अस्थिरता बढ़ सकती है और वैश्विक स्तर पर नए संकट पैदा हो सकते हैं
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