चीन का ‘डिवाइन ड्रैगन’ फिर सक्रिय: चौथी बार अंतरिक्ष में दिखा रहस्यमय स्पेस प्लेन, दुनिया क्यों सशंकित?

बीजिंग/जिउक्वान। चीन ने अपने बहुचर्चित और गोपनीय रीयूजेबल स्पेस प्लेन को एक बार फिर अंतरिक्ष में भेज दिया है। वैज्ञानिक जगत में ‘डिवाइन ड्रैगन’ के नाम से पहचाना जाने वाला यह स्पेसक्राफ्ट 7 फरवरी 2026 को उत्तर-पश्चिम चीन के जिउक्वान सैटेलाइट लॉन्च सेंटर से लॉन्च किया गया। इस मिशन की खास बात यह है कि यह 2020 के बाद चौथी बार ऑर्बिट में पहुंचा है, लेकिन इसके असली उद्देश्य को लेकर अब भी सस्पेंस बरकरार है।

चीनी विशेषज्ञ इस स्पेस प्लेन को शेनलॉन्ग कहते हैं। इसे जिउक्वान सैटेलाइट लॉन्च सेंटर से लॉन्ग मार्च-2F रॉकेट के जरिए अंतरिक्ष में भेजा गया। फिलहाल यह पृथ्वी की निचली कक्षा (LEO) में चक्कर लगा रहा है।

2020 से लगातार उड़ान, लेकिन मिशन पर चुप्पी क्यों?

चीन के सरकारी मीडिया ने इस मिशन को “तकनीकी परीक्षण” और “शांतिपूर्ण अंतरिक्ष उपयोग” का हिस्सा बताया है। आधिकारिक बयान के अनुसार, यह कार्यक्रम भविष्य में सस्ती और आसान राउंड-ट्रिप स्पेस ट्रैवल तकनीक विकसित करने के लिए है।

हालांकि, अब तक न तो इसके पेलोड की जानकारी सार्वजनिक की गई है, न ही इसकी विस्तृत तस्वीरें जारी की गई हैं। यही कारण है कि अंतरराष्ट्रीय स्पेस विशेषज्ञ लगातार इसके ऑर्बिटल ट्रैकिंग डेटा पर नजर रखे हुए हैं।

अमेरिकी X-37B जैसा डिजाइन?

अंतरिक्ष विश्लेषकों का कहना है कि यह स्पेसक्राफ्ट देखने में काफी हद तक अमेरिका के X-37B जैसा प्रतीत होता है। यह मानवरहित है और दोबारा इस्तेमाल किया जा सकता है।

लॉन्च के लिए इसे रॉकेट की जरूरत होती है, लेकिन वापसी के समय यह सामान्य हवाई जहाज की तरह रनवे पर लैंड करता है। यही क्षमता इसे रणनीतिक रूप से बेहद अहम बनाती है।

दुनिया की चिंता बढ़ाने वाली 3 बड़ी वजहें

1. ऑर्बिट में ‘अज्ञात वस्तुएं’ छोड़ने का दावा

2023 और 2024 के पिछले मिशनों के दौरान ट्रैकिंग एजेंसियों ने दावा किया था कि इस स्पेस प्लेन ने 6-7 अज्ञात वस्तुएं अंतरिक्ष में छोड़ीं। कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि ये माइक्रो सैटेलाइट्स हो सकते हैं, जिनका उपयोग सिग्नल टेस्टिंग या निगरानी के लिए किया जा सकता है।

2. उत्तरी अमेरिका के ऊपर संदिग्ध सिग्नल

अमेरिकी ट्रैकर्स के अनुसार, यह यान उत्तरी अमेरिका के ऊपर से गुजरते समय विशेष रेडियो सिग्नल प्रसारित करता है। इससे आशंका जताई जा रही है कि कहीं यह इलेक्ट्रॉनिक इंटेलिजेंस या जासूसी मिशन का हिस्सा तो नहीं।

3. डिजाइन और पेलोड पर पूर्ण गोपनीयता

चीन ने अब तक इस विमान की आधिकारिक तस्वीर, विस्तृत डिजाइन या पेलोड की जानकारी साझा नहीं की है। कुछ रक्षा विश्लेषक इसे संभावित एंटी-सैटेलाइट क्षमता से भी जोड़कर देख रहे हैं। हालांकि, इसकी पुष्टि नहीं हुई है।

महीनों तक अंतरिक्ष में रहने की क्षमता

जानकारी के मुताबिक यह स्पेस प्लेन महीनों तक ऑर्बिट में रह सकता है। लंबी अवधि तक अंतरिक्ष में सक्रिय रहने की यह क्षमता इसे रणनीतिक रूप से और भी अहम बना देती है। इससे इसकी गतिविधियों को ट्रैक करना चुनौतीपूर्ण हो जाता है।

क्या है चीन की रणनीति?

चीन तेजी से अपनी अंतरिक्ष क्षमताओं का विस्तार कर रहा है। चंद्र मिशन, स्पेस स्टेशन और अब रीयूजेबल स्पेस प्लेन—ये सभी संकेत देते हैं कि बीजिंग वैश्विक स्पेस रेस में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराना चाहता है।

फिलहाल, चीन का आधिकारिक रुख यही है कि यह मिशन पूरी तरह शांतिपूर्ण और तकनीकी परीक्षणों तक सीमित है। लेकिन पारदर्शिता की कमी ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय की उत्सुकता और चिंता दोनों बढ़ा दी हैं।

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