चंद्रपुर महापौर चुनाव: ‘दोस्ती’ में पड़ी दरार ने कांग्रेस को डुबाया, सबसे बड़ी पार्टी होने के बाद भी भाजपा का कब्जा

चंद्रपुर। महाराष्ट्र के विदर्भ क्षेत्र में कांग्रेस को अपनी ही गुटबाजी की भारी कीमत चुकानी पड़ी है। चंद्रपुर महानगर पालिका में 27 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरने के बावजूद, कांग्रेस अपना महापौर बनाने में नाकाम रही। मंगलवार को हुए नाटकीय घटनाक्रम और हाई-वोल्टेज ड्रामे के बाद भाजपा की संगीता खांडेकर नई महापौर चुनी गईं। उन्होंने कांग्रेस की वैशाली महाडोळे को मात्र 1 वोट के अंतर से (32 बनाम 31) पटखनी दी।


सांसद बनाम विधायक: वडेट्टीवार और धानोरकर की जंग

इस हार की पटकथा कांग्रेस के दो दिग्गज नेताओं—लोकसभा सांसद प्रतिभा धानोरकर और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष विजय वडेट्टीवार की आपसी खींचतान ने लिखी। कभी वडेट्टीवार ने ही प्रतिभा के पति स्वर्गीय बालू धानोरकर को कांग्रेस में लाकर सांसद बनाया था, लेकिन टिकट बंटवारे और वर्चस्व की लड़ाई ने दोनों को कट्टर दुश्मन बना दिया। इस गुटबाजी का आलम यह था कि 27 नगरसेवकों वाली पार्टी दो खेमों (13 धानोरकर गुट और 14 वडेट्टीवार गुट) में बंट गई।

समृद्धि महामार्ग पर ‘अपहरण’ की कोशिश और बसों की सियासत

चुनाव से पहले चंद्रपुर की राजनीति किसी फिल्मी थ्रिलर जैसी नजर आई। दोनों गुटों ने अपने-अपने नगरसेवकों को टूटने से बचाने के लिए बसों में भरकर शहर से बाहर भेज दिया। 29 जनवरी को वर्धा के पास समृद्धि महामार्ग पर वडेट्टीवार गुट के नगरसेवकों से भरी बस को स्कार्पियो सवार नकाबपोशों ने घेर लिया। आरोप लगा कि धानोरकर गुट ने महिला नगरसेविकाओं के साथ बदसलूकी की और बस के ‘अपहरण’ का प्रयास किया। मामला पुलिस तक पहुंचा, लेकिन पार्टी की साख मिट्टी में मिल गई।

दिल्ली में हुई बैठक भी रही बेअसर, हाईकमान रहा मूकदर्शक

जब मामला हाथ से निकलने लगा, तब पार्टी आलाकमान ने दिल्ली में के.सी. वेणुगोपाल के आवास पर बैठक बुलाई। तय हुआ कि महापौर धानोरकर गुट से होगा और उपमहापौर वडेट्टीवार गुट से। लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। स्थानीय स्तर पर तालमेल की कमी और आपसी अविश्वास ने ‘इंडिया गठबंधन’ के साथी उद्धव ठाकरे की शिवसेना (UBT) को भी नाराज कर दिया।

ठाकरे गुट की नाराजगी और भाजपा की चांदी

महानगर पालिका में 6 नगरसेवकों वाली शिवसेना (UBT) ने किंगमेकर की भूमिका निभाई। ठाकरे गुट के जिला प्रमुख संदीप गिऱ्हे ने आरोप लगाया कि सांसद प्रतिभा धानोरकर की ‘जिद’ और उनसे संपर्क न करने की वजह से गठबंधन टूट गया। अंततः, ठाकरे गुट के समर्थन से भाजपा ने बाजी मार ली। कांग्रेस के लिए यह हार केवल एक नगर निकाय की हार नहीं, बल्कि 2026 के आगामी चुनावों से पहले सांगठनिक कमजोरी का बड़ा संकेत है।

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