Chandra Grahan 2026: दोपहर 3:20 बजे लगेगा साल का पहला चंद्रग्रहण, सिंह राशि में चंद्रमा पीड़ित—इन मंत्रों के जप से मिलेगा नकारात्मक प्रभाव से बचाव

3 मार्च 2026 को दोपहर 3 बजकर 20 मिनट पर साल का पहला चंद्रग्रहण लगने जा रहा है। ज्योतिष गणनाओं के अनुसार यह चंद्रग्रहण सिंह राशि में घटित होगा और भारत समेत कई देशों में दिखाई देगा। धार्मिक मान्यताओं में चंद्रग्रहण को विशेष महत्व दिया गया है, क्योंकि इस दौरान चंद्रमा को पीड़ित अवस्था में माना जाता है। ऐसे समय में ईश्वर का स्मरण और मंत्रों का जप करने से नकारात्मक ऊर्जा से बचाव और मानसिक शांति प्राप्त होती है। ज्योतिषाचार्य पंडित राकेश झा के मुताबिक, ग्रहण काल में किए गए मंत्र जप का प्रभाव कई गुना बढ़ जाता है।

सूतक काल सुबह 6:20 बजे से शुरू

चंद्रग्रहण का सूतक काल सुबह 6 बजकर 20 मिनट से प्रारंभ हो चुका है। शास्त्रों के अनुसार सूतक काल में पूजा-पाठ, भोजन और शुभ कार्यों से परहेज करने की सलाह दी जाती है। इस दौरान ध्यान, जप और साधना करना विशेष फलदायी माना गया है। मान्यता है कि ग्रहण के समय सकारात्मक ऊर्जा बनाए रखने के लिए मंत्रों का निरंतर जाप करना चाहिए।

राशि अनुसार करें विशेष मंत्रों का जप

ग्रहण के दौरान अपनी राशि के अनुसार मंत्रों का जप करना शुभ माना गया है। जानिए किस राशि के जातक कौन सा मंत्र जपें—

मेष राशि – ओम क्रां क्रीं क्रौं सः भौमाय नमः
वृषभ राशि – ओम ह्रीं श्रीं शुक्राय नमः
मिथुन राशि – ओम ऐं श्रीं श्रीं बुधाय नमः
कर्क राशि – ओम चंद्राय नमः
सिंह राशि – ओम घृणि सूर्याय नमः
कन्या राशि – ओम ब्रां ब्रीं ब्रौं सः बुधाय नमः
तुला राशि – ओम शुं शुक्राय नमः
वृश्चिक राशि – ओम अं अंगारकाय नमः
धनु राशि – ओम बृं बृहस्पतये नमः
मकर राशि – ओम शं शनैश्चराय नमः
कुंभ राशि – ओम प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः
मीन राशि – ओम बृहस्पतये विद्महे दिव्यचक्षुषे धीमहि तन्नो गुरुः प्रचोदयात्

इन सार्वभौमिक मंत्रों का जप भी देगा विशेष फल

यदि आपने गुरु मंत्र लिया हुआ है तो ग्रहण काल में उसका जप करना अत्यंत शुभ रहेगा। इसके अलावा महामृत्युंजय मंत्र “ओम त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम् उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्” का जाप मानसिक तनाव को दूर करने और सकारात्मकता बढ़ाने में सहायक माना गया है।
गायत्री मंत्र “ओम भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात्” का जप बुद्धि की शुद्धि और विचारों की स्पष्टता के लिए लाभकारी बताया गया है।
“ओम नमः शिवाय” का निरंतर स्मरण भी ग्रहण के दुष्प्रभावों को कम करने वाला माना जाता है।

चंद्र देव को प्रसन्न करने के लिए “ओम श्रां श्रीं श्रौं सः चन्द्रमसे नमः”, “ओम चंद्राय नमः” और “ओम क्षीर पुत्राय विद्महे अमृत तत्वाय धीमहि तन्नो चन्द्र प्रचोदयात्” जैसे मंत्रों का जप भी किया जा सकता है। मान्यता है कि इन मंत्रों के प्रभाव से अशांत मन को शांति मिलती है और नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है।

धार्मिक आस्था के अनुसार चंद्रग्रहण आत्मचिंतन, साधना और आध्यात्मिक उन्नति का अवसर होता है। ऐसे में संयम, श्रद्धा और नियम के साथ मंत्र जप करने से व्यक्ति मानसिक संतुलन बनाए रख सकता है और ग्रहण के संभावित नकारात्मक प्रभावों से खुद को सुरक्षित रख सकता है।

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