
नई दिल्ली। सनातन परंपरा में वैशाख मास की पूर्णिमा का विशेष महत्व माना गया है। इस वर्ष बुद्ध पूर्णिमा 1 मई 2026, शुक्रवार को मनाई जाएगी। यह दिन भगवान बुद्ध के जन्म, ज्ञान प्राप्ति और महापरिनिर्वाण—तीनों से जुड़ा होने के कारण अत्यंत पवित्र माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन स्नान, दान और पूजा करने से विशेष पुण्य फल की प्राप्ति होती है।
शुभ मुहूर्त और तिथि का संयोग
हिंदू पंचांग के अनुसार वैशाख पूर्णिमा तिथि का आरंभ 30 अप्रैल की रात से होगा और 1 मई को इसका मुख्य प्रभाव रहेगा। उदया तिथि के अनुसार 1 मई को ही बुद्ध पूर्णिमा का पर्व मनाया जाएगा। इस दिन प्रातःकाल पवित्र नदी या घर में ही गंगाजल मिलाकर स्नान करना अत्यंत शुभ माना जाता है।
स्नान-दान का विशेष महत्व
धार्मिक ग्रंथों में उल्लेख है कि बुद्ध पूर्णिमा के दिन किया गया दान कई गुना फलदायी होता है। इस दिन जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र, जल, फल और दक्षिणा देना विशेष लाभकारी माना गया है। साथ ही पशु-पक्षियों को दाना-पानी देना भी पुण्यकारी बताया गया है।
पूजा विधि: ऐसे करें भगवान बुद्ध की आराधना
सुबह स्नान के बाद घर के पूजा स्थल या मंदिर में भगवान बुद्ध की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें। उन्हें फूल, धूप, दीप और नैवेद्य अर्पित करें। इसके बाद शांति और करुणा का संदेश देने वाले उनके उपदेशों का स्मरण करें। कई लोग इस दिन बौद्ध विहारों में जाकर विशेष प्रार्थना सभाओं में भी भाग लेते हैं।
ध्यान और साधना का दिन
बुद्ध पूर्णिमा केवल धार्मिक अनुष्ठानों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आत्मचिंतन और ध्यान का भी महत्वपूर्ण अवसर है। इस दिन ध्यान करने से मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है। भगवान बुद्ध के बताए मार्ग—अहिंसा, करुणा और मध्यम मार्ग—को जीवन में अपनाने का संकल्प लिया जाता है।
क्या करें और क्या न करें
इस दिन क्रोध, विवाद और नकारात्मक विचारों से दूर रहना चाहिए। सात्विक भोजन करना और जरूरतमंदों की मदद करना शुभ माना जाता है। मांसाहार और मद्यपान से परहेज करना चाहिए।
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