‘100 विधायक लाओ और सीएम बन जाओ’: योगी के विदेश जाते ही अखिलेश का बड़ा ‘ऑफर’, यूपी की सियासत में भूचाल

लखनऊ: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सरकारी विदेशी दौरे पर रवाना होते ही सूबे की सियासत में ‘ऑफर पॉलिटिक्स’ शुरू हो गई है। समाजवादी पार्टी के मुखिया और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने भाजपा खेमे में बड़ी सेंधमारी की कोशिश करते हुए एक सनसनीखेज प्रस्ताव दिया है। अखिलेश ने सीधे तौर पर कहा है कि भाजपा का जो भी बड़ा नेता 100 विधायक तोड़कर लाएगा, उसे मुख्यमंत्री पद का समर्थन दिया जा सकता है। इस बयान के बाद यूपी की राजनीति में कयासों का बाजार गर्म है और भाजपा ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया दी है।

योगी के विदेश दौरे के बीच ‘सियासी सर्जिकल स्ट्राइक’

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ औद्योगिक निवेश और ग्लोबल पार्टनरशिप को बढ़ावा देने के लिए विदेश दौरे पर हैं। उनकी अनुपस्थिति में अखिलेश यादव ने राज्य की कानून व्यवस्था और प्रशासनिक मुद्दों को लेकर सरकार को घेरा। अखिलेश ने चुटकी लेते हुए कहा कि जब मुखिया शहर में नहीं हैं, तो भाजपा के भीतर की असंतोष की ज्वाला बाहर आ रही है। उन्होंने ‘100 विधायक लाओ, सरकार बनाओ’ वाला बिहार का पुराना फॉर्मूला यूपी में भी दोहराने के संकेत दिए हैं।

केशव मौर्य और विपक्षी एकता पर चर्चा

अखिलेश यादव का यह बयान ऐसे समय में आया है जब पिछले कुछ समय से यूपी भाजपा के भीतर ‘संगठन बनाम सरकार’ की खबरें चर्चा में रही हैं। हालांकि अखिलेश ने किसी का नाम नहीं लिया, लेकिन राजनीतिक गलियारों में इसे डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य और अन्य असंतुष्ट गुटों के लिए एक खुला आमंत्रण माना जा रहा है। अखिलेश ने कहा कि भाजपा के कई विधायक और मंत्री उनके संपर्क में हैं और वे घुटन महसूस कर रहे हैं।

भाजपा का पलटवार: ‘मुंगेरीलाल के हसीन सपने’

अखिलेश यादव के इस ‘ऑफर’ पर भाजपा ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। भाजपा प्रवक्ताओं का कहना है कि सपा अध्यक्ष ‘मुंगेरीलाल के हसीन सपने’ देख रहे हैं। भाजपा ने कहा कि सरकार पूरी तरह एकजुट है और अखिलेश यादव अपनी पार्टी के टूटते कुनबे को बचाने के लिए इस तरह की बयानबाजी कर रहे हैं। भाजपा नेताओं ने आरोप लगाया कि अखिलेश जनता का ध्यान भटकाने के लिए अनर्गल प्रलाप कर रहे हैं।

2027 की तैयारी या गठबंधन में दरार?

जानकारों का मानना है कि अखिलेश यादव का यह दांव 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले मनोवैज्ञानिक दबाव बनाने की रणनीति है। हालिया उपचुनावों और विधानसभा सत्र के दौरान सपा ने जिस तरह से आक्रामक रुख अपनाया है, उससे साफ है कि वह भाजपा के भीतर किसी भी तरह की दरार का फायदा उठाने को तैयार है। अब देखना यह होगा कि योगी आदित्यनाथ के विदेश से लौटने के बाद इस सियासी युद्ध में क्या नया मोड़ आता है।

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