ट्रंप की मदद से ब्राजील छोड़कर अमेरिका पहुंचे बोल्सोनारो, 42 घंटे चला पूरा ऑपरेशन; इतालवी पासपोर्ट से पार की सीमा

ब्राजील की राजनीति में उस समय बड़ा विवाद खड़ा हो गया, जब राष्ट्रपति चुनाव में हार का सामना करने के बाद फ्लावियो बोल्सोनारो अपने परिवार के साथ देश छोड़कर अमेरिका पहुंच गए। उनकी ब्राजील से अमेरिका तक की यात्रा किसी फिल्मी घटनाक्रम से कम नहीं रही। इस दौरान अर्जेंटीना और इक्वाडोर के रास्ते का इस्तेमाल किया गया। पूरे घटनाक्रम में करीब 42 घंटे लगे। इस मामले में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की भूमिका भी चर्चा में है। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, ट्रंप प्रशासन ने फ्लावियो और उनके परिवार को अमेरिका में प्रवेश देने के लिए वीजा उपलब्ध कराने में मदद की।

कौन हैं फ्लावियो बोल्सोनारो, जिन्हें छोड़ना पड़ा ब्राजील?

यहां एक महत्वपूर्ण बात समझना जरूरी है। इस घटनाक्रम में ब्राजील के पूर्व राष्ट्रपति जायर बोल्सोनारो नहीं, बल्कि उनके बेटे और सीनेटर फ्लावियो बोल्सोनारो शामिल हैं।

फ्लावियो ने ब्राजील के राष्ट्रपति चुनाव में लुइज इनासियो लूला दा सिल्वा के खिलाफ चुनाव लड़ा था। चुनाव में हार के बाद उन्होंने देश की राजनीति में अपनी भूमिका जारी रखने की बात कही थी। इसी बीच उनके पासपोर्ट को लेकर कानूनी विवाद सामने आया और उनके देश छोड़ने की खबर ने राजनीतिक हलचल बढ़ा दी।

रिपोर्टों के मुताबिक, ब्राजील के सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश एलेक्जेंडर डी मोरेस ने फ्लावियो के पासपोर्ट से संबंधित कार्रवाई का आदेश दिया था। उन्हें अपने पासपोर्ट जमा करने के निर्देश भी दिए गए थे। इसके बावजूद फ्लावियो ने परिवार के साथ ब्राजील छोड़ दिया।

इतालवी पासपोर्ट से अर्जेंटीना पहुंचे फ्लावियो

फ्लावियो बोल्सोनारो ने अपनी पत्नी फर्नांडा और दो बेटियों के साथ ब्राजील से निकलने के लिए अर्जेंटीना का रास्ता चुना। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, 27 अक्टूबर की रात परिवार ने ब्राजील और अर्जेंटीना को जोड़ने वाले टैनक्रेडो नेवेस अंतरराष्ट्रीय पुल के जरिए सीमा पार की।

इस दौरान फ्लावियो ने अर्जेंटीना में प्रवेश के लिए इतालवी पासपोर्ट का इस्तेमाल किया। उनकी पत्नी और बेटियों ने ब्राजील के पासपोर्ट का उपयोग किया।

इस यात्रा की सबसे अहम बात यह रही कि परिवार ब्राजील के किसी नियमित संघीय पुलिस इमिग्रेशन चेकपॉइंट से होकर नहीं गुजरा। ब्राजील के अधिकारियों के अनुसार, भूमि सीमा से बाहर जाने वाले नागरिकों के लिए उस रास्ते पर नियमित निकास जांच की व्यवस्था अलग है।

अर्जेंटीना के अधिकारियों ने बाद में परिवार के प्रवेश की पुष्टि की। इस घटनाक्रम ने ब्राजील की सुरक्षा और सीमा निगरानी व्यवस्था को लेकर भी सवाल खड़े कर दिए।

अर्जेंटीना से प्राइवेट जेट में इक्वाडोर और फिर अमेरिका का सफर

अर्जेंटीना पहुंचने के बाद फ्लावियो और उनका परिवार एक निजी विमान से इक्वाडोर के ग्वायाकिल के लिए रवाना हुआ। यहां विमान ने कुछ समय के लिए ठहराव लिया और इसके बाद अमेरिका के मियामी की ओर उड़ान भरी।

28 अक्टूबर को फ्लावियो अपने परिवार के साथ मियामी पहुंच गए। इस पूरी यात्रा के दौरान उनके ठिकाने को लेकर कई तरह की खबरें सामने आती रहीं। शुरुआत में उनके अमेरिका पहुंचने की चर्चाएं थीं, जबकि अर्जेंटीना में उनके प्रवेश की आधिकारिक पुष्टि बाद में हुई।

फोल्हा डी साओ पाउलो की रिपोर्ट के अनुसार, फ्लावियो ने अर्जेंटीना में प्रवेश के लिए इतालवी पासपोर्ट का इस्तेमाल किया था। अमेरिका पहुंचने के दौरान उनके ब्राजीलियाई राजनयिक पासपोर्ट के इस्तेमाल की जानकारी भी रिपोर्ट में दी गई है।

ट्रंप प्रशासन ने कैसे की मदद?

इस पूरे मामले में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की भूमिका सबसे ज्यादा चर्चा में रही। फ्लावियो बोल्सोनारो और ट्रंप के राजनीतिक संबंध पहले से ही मजबूत माने जाते हैं।

रिपोर्टों के मुताबिक, ट्रंप प्रशासन को फ्लावियो के अमेरिका आने की जानकारी थी और उनके परिवार को अमेरिका में प्रवेश के लिए वीजा देने की व्यवस्था की गई। द न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के हवाले से यह भी बताया गया कि ट्रंप के सहयोगियों ने उनकी यात्रा में मदद की थी।

कुछ रिपोर्टों में अमेरिकी प्रशासन से जुड़े लोगों और फ्लावियो के सहयोगियों के बीच संपर्क तथा निजी विमान की व्यवस्था में मदद किए जाने का दावा किया गया है। हालांकि, पूरी यात्रा के प्रत्येक चरण में ट्रंप की प्रत्यक्ष भूमिका को स्वतंत्र रूप से स्थापित नहीं किया गया है।

ट्रंप ने भी फ्लावियो के अमेरिका आने के सवाल पर सकारात्मक रुख दिखाया था। इस घटनाक्रम ने अमेरिका और ब्राजील के बीच राजनीतिक संबंधों को लेकर नई बहस छेड़ दी है।

ब्राजील में बढ़ सकता है राजनीतिक विवाद

फ्लावियो के देश छोड़ने के बाद ब्राजील में इस मामले की जांच शुरू हो गई। ब्राजील की संघीय पुलिस ने उनके देश से बाहर जाने की परिस्थितियों की जांच करने की जानकारी दी है।

मामले का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि फ्लावियो विभिन्न वित्तीय जांचों का सामना कर रहे हैं। इनमें कथित मनी लॉन्ड्रिंग और अन्य वित्तीय अनियमितताओं से जुड़े मामले शामिल हैं। फ्लावियो ने अपने ऊपर लगे आरोपों को गलत बताया है।

ब्राजील के राष्ट्रपति लूला ने भी उनके देश छोड़ने पर नाराजगी जताई। दूसरी तरफ, फ्लावियो के समर्थकों ने इस घटनाक्रम को राजनीतिक दबाव से जोड़कर पेश किया है।

फिलहाल यह मामला केवल एक नेता के देश छोड़ने तक सीमित नहीं रह गया है। इसमें पासपोर्ट, अंतरराष्ट्रीय सीमा सुरक्षा, अमेरिका की राजनीतिक भूमिका और ब्राजील की घरेलू राजनीति जैसे कई अहम मुद्दे शामिल हो गए हैं।

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