
एनएसए अजीत डोभाल ने बिम्सटेक राष्ट्रीय सुरक्षा प्रमुखों की 5वीं बैठक में क्षेत्रीय सुरक्षा, आर्थिक सहयोग और कनेक्टिविटी को मजबूत करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि मौजूदा वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए सदस्य देशों के बीच बेहतर समन्वय बेहद जरूरी है।
नई दिल्ली। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजीत डोभाल ने गुरुवार को आयोजित बिम्सटेक (BIMSTEC) राष्ट्रीय सुरक्षा प्रमुखों की पांचवीं बैठक में भारत की क्षेत्रीय रणनीति और सुरक्षा दृष्टिकोण को विस्तार से रखा। उन्होंने कहा कि बिम्सटेक भारत की ‘नेबरहुड फर्स्ट’, ‘एक्ट ईस्ट’ और ‘महासागर (MAHASAGAR)’ विजन का महत्वपूर्ण आधार है। डोभाल ने सदस्य देशों से क्षेत्रीय सुरक्षा, संपर्क, क्षमता निर्माण और आर्थिक साझेदारी को नई गति देने का आह्वान किया।
बिम्सटेक भारत की विदेश नीति का अहम स्तंभ
उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए अजीत डोभाल ने कहा कि भारत के लिए बिम्सटेक केवल एक क्षेत्रीय संगठन नहीं, बल्कि पड़ोसी देशों के साथ मजबूत संबंध स्थापित करने की नीति का प्रमुख माध्यम है। उन्होंने कहा कि ‘नेबरहुड फर्स्ट’ नीति पड़ोसी देशों के साथ विश्वास और सहयोग बढ़ाने पर केंद्रित है, जबकि ‘एक्ट ईस्ट’ नीति के जरिए पूर्वी और दक्षिण-पूर्व एशिया के देशों के साथ रणनीतिक एवं आर्थिक संबंधों को और मजबूत किया जा रहा है। इसके साथ ही ‘महासागर’ विजन क्षेत्रीय सुरक्षा और साझा विकास की अवधारणा को आगे बढ़ाता है।
वैश्विक संकटों के बीच सहयोग बढ़ाने की जरूरत
एनएसए ने कहा कि दुनिया इस समय कई तरह की चुनौतियों का सामना कर रही है। विभिन्न क्षेत्रों में जारी संघर्ष, भू-राजनीतिक अस्थिरता और तेजी से बदलती तकनीक ने सुरक्षा संबंधी जोखिमों को पहले से अधिक जटिल बना दिया है। इसके अलावा वैश्विक सप्लाई चेन में आई बाधाओं का असर कई देशों की अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ा है। ऐसे हालात में बिम्सटेक सदस्य देशों के बीच मजबूत समन्वय, साझा रणनीति और नियमित संवाद समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।
साझा चुनौतियों का मिलकर निकालना होगा समाधान
अजीत डोभाल ने कहा कि क्षेत्रीय शांति और स्थिरता बनाए रखने के लिए सदस्य देशों को अपने साझा हितों को प्राथमिकता देनी होगी। उन्होंने कहा कि आपसी सहयोग, विचार-विमर्श और सामूहिक प्रयासों के माध्यम से ही सुरक्षा और आर्थिक चुनौतियों का प्रभावी समाधान निकाला जा सकता है। उन्होंने क्षमता निर्माण, सीमा-पार सहयोग और क्षेत्रीय संपर्क बढ़ाने पर भी विशेष जोर दिया।
क्यों महत्वपूर्ण है BIMSTEC?
डोभाल ने कहा कि बिम्सटेक हिंद महासागर क्षेत्र के सबसे महत्वपूर्ण और तेजी से विकसित हो रहे देशों को एक मंच पर लाता है। उन्होंने बताया कि इस संगठन से जुड़े देशों की कुल आबादी करीब 1.7 अरब है, जो दुनिया की लगभग 22 प्रतिशत आबादी के बराबर है। वहीं, सदस्य देशों की संयुक्त अर्थव्यवस्था लगभग 5 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर की है, जिससे यह संगठन वैश्विक आर्थिक और रणनीतिक दृष्टि से भी बेहद महत्वपूर्ण बन जाता है।
क्षेत्रीय सुरक्षा और आर्थिक साझेदारी पर भारत का फोकस
बैठक के दौरान भारत ने स्पष्ट किया कि आने वाले समय में क्षेत्रीय सुरक्षा, आर्थिक सहयोग, कनेक्टिविटी, तकनीकी साझेदारी और क्षमता निर्माण जैसे क्षेत्रों में बिम्सटेक देशों के बीच सहयोग को और मजबूत करने की दिशा में लगातार प्रयास किए जाएंगे। भारत का मानना है कि साझा विकास और मजबूत क्षेत्रीय सहयोग ही भविष्य की चुनौतियों से निपटने का सबसे प्रभावी रास्ता है।
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