
लखनऊ। Yogi Adityanath की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई Uttar Pradesh Cabinet की बैठक में राज्य कर्मचारियों को लेकर बड़ा और सख्त फैसला लिया गया। सरकार ने भ्रष्टाचार पर लगाम कसने और प्रशासनिक पारदर्शिता बढ़ाने के उद्देश्य से सरकारी कर्मचारियों के निवेश और संपत्ति से जुड़े नियमों में अहम बदलाव करने का निर्णय लिया है।
कैबिनेट बैठक में कुल 30 प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। इनमें से एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव कार्मिक विभाग से संबंधित था, जिसके तहत अब राज्य कर्मचारियों को शेयर बाजार या अन्य निवेशों में की गई बड़ी राशि की जानकारी सरकार को देनी होगी।
छह महीने की सैलरी से ज्यादा निवेश की देनी होगी सूचना
कैबिनेट के फैसले के बाद प्रदेश के वित्त मंत्री Suresh Khanna ने बताया कि यदि कोई सरकारी कर्मचारी एक कैलेंडर वर्ष में अपने छह महीने के मूल वेतन से अधिक की राशि Stock Market या अन्य निवेश माध्यमों में लगाता है, तो उसे इसकी सूचना अधिकृत अधिकारी को देना अनिवार्य होगा।
सरकार इस फैसले को लागू करने के लिए राज्य कर्मचारियों की आचरण नियमावली 1956 में संशोधन करेगी। अधिकारियों के अनुसार यह व्यवस्था सरकारी तंत्र में पारदर्शिता बढ़ाने और संदिग्ध निवेश पर नजर रखने के उद्देश्य से लागू की जा रही है।
महंगी चल संपत्ति खरीदने पर भी देना होगा ब्यौरा
नए नियमों के तहत यदि कोई कर्मचारी अपनी दो महीने की सैलरी से अधिक मूल्य की चल संपत्ति खरीदता या बेचता है तो उसे इसकी जानकारी भी देनी होगी।
चल संपत्ति में कार, सोना, महंगे इलेक्ट्रॉनिक सामान या अन्य कीमती वस्तुएं शामिल हैं। सरकार का मानना है कि इससे कर्मचारियों की आय और संपत्ति के बीच संतुलन की निगरानी करना आसान होगा।
पहले एक महीने की सीमा थी, अब नियम हुए सख्त
अब तक के नियमों के अनुसार कर्मचारियों को एक महीने के मूल वेतन से अधिक की चल संपत्ति का विवरण देना होता था। लेकिन नए संशोधन के बाद इस व्यवस्था को और सख्त बना दिया गया है।
इसके अलावा अचल संपत्ति की जानकारी देने की व्यवस्था भी बदली जा रही है। पहले कर्मचारियों को हर पांच साल में अपनी अचल संपत्ति का विवरण देना पड़ता था, लेकिन अब यह जानकारी हर साल देना अनिवार्य होगी।
दान में मिली संपत्ति और परिवार के नाम संपत्ति भी बतानी होगी
सरकार ने स्पष्ट किया है कि कर्मचारियों को सिर्फ अपनी ही नहीं बल्कि परिवार के सदस्यों के नाम पर अर्जित संपत्ति का भी विवरण देना होगा।
इसमें खरीदी गई संपत्ति, दान में प्राप्त संपत्ति, पट्टे पर ली गई जमीन या मकान और अन्य निवेश भी शामिल होंगे। सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी कर्मचारी अप्रत्यक्ष रूप से संपत्ति छिपा न सके।
ऑनलाइन पोर्टल पर हर साल भरना होगा संपत्ति विवरण
सेवा नियमावली के नियम 24 में किए गए संशोधन के बाद राज्य कर्मचारियों को हर साल अपनी संपत्ति का पूरा ब्योरा ऑनलाइन पोर्टल पर दर्ज करना होगा।
यदि कोई कर्मचारी निर्धारित समय पर संपत्ति का विवरण नहीं देता है तो उसके खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जा सकती है। इतना ही नहीं, ऐसे कर्मचारियों का प्रमोशन भी रोका जा सकता है।
सरकार का मानना है कि यह कदम प्रशासनिक व्यवस्था को अधिक पारदर्शी बनाएगा और भ्रष्टाचार के मामलों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करने में मदद करेगा।
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