
लखनऊ। बहुजन समाज पार्टी (BSP) सुप्रीमो मायावती ने संगठन में अनुशासन को लेकर बड़ा कदम उठाते हुए पश्चिमी उत्तर प्रदेश के प्रभावशाली नेता विक्रम सिंह को पार्टी से निष्कासित कर दिया है। उन पर आरोप है कि उन्होंने पार्टी नेतृत्व को पूरी जानकारी दिए बिना आपराधिक छवि वाले लोगों को बसपा की सदस्यता दिला दी। इस कार्रवाई के बाद पार्टी के अंदर हलचल तेज हो गई है और पश्चिमी यूपी की राजनीति में भी इसे अहम घटनाक्रम माना जा रहा है।
अपराधियों को पार्टी में शामिल कराने का आरोप
बसपा नेतृत्व के अनुसार विक्रम सिंह ने मेरठ क्षेत्र के दो विवादित व्यक्तियों—सुशील फौजी और वसीम मुन्ने—को पार्टी में शामिल कराया था। बताया जा रहा है कि 22 जनवरी को इन दोनों की मुलाकात बसपा प्रमुख मायावती से कराई गई और उसके बाद उन्हें सदस्यता दिला दी गई।
जब स्थानीय स्तर पर इन दोनों की आपराधिक पृष्ठभूमि को लेकर सवाल उठे तो मामला पार्टी नेतृत्व तक पहुंचा। इसके बाद मायावती ने पूरे प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए विक्रम सिंह के खिलाफ कड़ा कदम उठाया और उन्हें पार्टी से बाहर कर दिया।
वसीम मुन्ने पर दर्ज हैं दर्जनों केस
जानकारी के मुताबिक मेरठ के मुंडाली थाना क्षेत्र के साफियाबाद लोटी गांव निवासी वसीम मुन्ने की छवि विवादित बताई जाती है। उसके खिलाफ पुलिस रिकॉर्ड में करीब 56 आपराधिक मुकदमे दर्ज बताए जाते हैं। पहला केस वर्ष 2007 में दर्ज हुआ था। ऐसे व्यक्ति को पार्टी में शामिल कराए जाने से बसपा नेतृत्व नाराज बताया जा रहा है।
गैंगस्टर बताया जाता है सुशील फौजी
दूसरा नाम सुशील फौजी का है, जो मेरठ के रोहटा थाना क्षेत्र के भदौड़ा गांव का रहने वाला है। पुलिस रिकॉर्ड में उसे हिस्ट्रीशीटर और गैंगस्टर बताया जाता है। उस पर हत्या, रंगदारी, लूट और बलवा समेत करीब 12 मुकदमे दर्ज होने की बात सामने आई है। क्षेत्र में उसकी दबंग छवि की चर्चा लंबे समय से होती रही है।
पश्चिमी यूपी में संगठनात्मक फेरबदल
विक्रम सिंह पर कार्रवाई के साथ ही बसपा ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश में संगठनात्मक बदलाव भी किए हैं। पार्टी ने कई मंडलों के समन्वयकों के प्रभार बदले हैं।
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सूरज सिंह जाटव को आगरा और अलीगढ़ मंडल की जिम्मेदारी दी गई है।
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जाफर मलिक को लखनऊ मंडल का कोऑर्डिनेटर बनाया गया है।
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वहीं मुनकाद अली को मेरठ, मुरादाबाद और बरेली मंडल की अहम जिम्मेदारी सौंपी गई है।
पश्चिमी यूपी में कमजोर पकड़ से भी नाराजगी
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में बसपा की कमजोर होती पकड़ भी इस सख्त कार्रवाई की एक वजह हो सकती है। हाल ही में अलीगढ़ में पार्टी के कार्यक्रम में अपेक्षित भीड़ न आने से भी नेतृत्व नाराज बताया गया था। ऐसे में संगठन को मजबूत करने और अनुशासन कायम रखने के लिए यह कदम उठाया गया है।
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