
Bangladesh India Projects: बांग्लादेश में नई राजनीतिक परिस्थितियों के बीच भारत और ढाका के रिश्तों को लेकर एक बड़ा संकेत सामने आया है। खबर है कि तारिक रहमान के नेतृत्व वाली सरकार भारत की वित्तीय सहायता से संचालित 11 अहम परियोजनाओं को रद्द करने पर विचार कर रही है। यदि ऐसा होता है तो दोनों देशों के बीच चल रहे विकास सहयोग और रणनीतिक साझेदारी पर इसका व्यापक असर पड़ सकता है।
भारत-बांग्लादेश सहयोग को लग सकता है बड़ा झटका
भारत और बांग्लादेश के बीच पिछले डेढ़ दशक में परिवहन, रेलवे, बंदरगाह, ऊर्जा और औद्योगिक विकास से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट्स शुरू किए गए थे। वर्तमान में दोनों देशों के बीच कुल 42 परियोजनाओं पर काम चल रहा है, जिन्हें भारत की लाइन ऑफ क्रेडिट (LoC) के तहत वित्तीय सहायता प्रदान की जा रही है।
सूत्रों के अनुसार, इन 42 परियोजनाओं में से 11 प्रोजेक्ट्स को बंद करने की प्रक्रिया शुरू हो सकती है। इनमें अधिकांश योजनाएं अभी शुरुआती या धीमी प्रगति के चरण में हैं। कुछ परियोजनाओं को लेकर अनुबंध की शर्तों और क्रियान्वयन प्रक्रिया पर भी मतभेद सामने आए थे।
मोहम्मद यूनुस सरकार के फैसले को आगे बढ़ा सकती है नई सरकार
जानकारी के मुताबिक, इन परियोजनाओं को समाप्त करने का प्रस्ताव पहली बार मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार के दौरान तैयार किया गया था। उस समय परियोजनाओं की समीक्षा के बाद कुछ योजनाओं को गैर-व्यावहारिक और अत्यधिक विलंबित माना गया था।
अब तारिक रहमान सरकार उसी सिफारिश को मंजूरी देने पर गंभीरता से विचार कर रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह फैसला भारत-बांग्लादेश संबंधों के नए दौर का संकेत भी हो सकता है।
किन परियोजनाओं पर लटक सकती है तलवार
जिन परियोजनाओं को बंद किए जाने की चर्चा है, उनमें रेलवे, औद्योगिक विकास, आर्थिक क्षेत्र और बंदरगाह विकास से जुड़े कई बड़े नाम शामिल हैं।
संभावित रूप से प्रभावित परियोजनाओं में खुलना-दर्शन डबल लाइन रेलवे ट्रैक, पार्वतीपुर-कौनिया रेलवे कन्वर्जन परियोजना, बोगुरा-सिराजगंज नई रेलवे लिंक, सैयदपुर कैरिज वर्कशॉप का आधुनिकीकरण, मोंगला आर्थिक क्षेत्र, बंगबंधु शेख मुजीब औद्योगिक नगर, पायरा पोर्ट मल्टीपर्पज टर्मिनल और ईश्वरदी एयरपोर्ट आधुनिकीकरण परियोजना शामिल हैं। इसके अलावा कुछ अन्य इंफ्रास्ट्रक्चर योजनाएं भी समीक्षा के दायरे में बताई जा रही हैं।
7.3 अरब डॉलर की क्रेडिट लाइन पर पड़ सकता है असर
भारत ने वर्ष 2010 से अब तक बांग्लादेश को तीन अलग-अलग चरणों में कुल 7.3 अरब डॉलर की लाइन ऑफ क्रेडिट उपलब्ध कराई है। यह भारत द्वारा किसी एक देश को दी गई सबसे बड़ी विकास सहायता योजनाओं में शामिल रही है।
पहले चरण में लगभग 862 मिलियन डॉलर की सहायता दी गई थी, जिसके तहत 15 परियोजनाएं शुरू हुईं। इनमें से अधिकांश पूरी हो चुकी हैं। इसके बाद 2 अरब डॉलर और फिर 4.5 अरब डॉलर की अतिरिक्त क्रेडिट लाइन जारी की गई, जिनका उद्देश्य परिवहन, स्वास्थ्य, सूचना प्रौद्योगिकी, ऊर्जा, रेलवे और शिपिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करना था।
यदि 11 परियोजनाएं रद्द होती हैं तो भारत की सक्रिय क्रेडिट लाइन का आकार घटकर लगभग 4.68 अरब डॉलर तक रह सकता है। हालांकि जो प्रोजेक्ट्स पहले से निर्माण के उन्नत चरण में पहुंच चुके हैं, उनके जारी रहने की संभावना जताई जा रही है।
सीमा विवाद और प्रवासियों के मुद्दे से बढ़ी दूरी
यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब भारत और बांग्लादेश के बीच कई संवेदनशील मुद्दों पर मतभेद दिखाई दे रहे हैं। अवैध बांग्लादेशी प्रवासियों के खिलाफ भारत की कार्रवाई पर ढाका पहले ही आपत्ति जता चुका है।
इसके अलावा सीमा प्रबंधन, नदी जल बंटवारा और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे विषयों पर भी दोनों देशों के बीच अलग-अलग दृष्टिकोण देखने को मिले हैं। ऐसे में भारत समर्थित परियोजनाओं की समीक्षा को केवल आर्थिक निर्णय नहीं बल्कि राजनीतिक और कूटनीतिक संकेत के रूप में भी देखा जा रहा है।
दक्षिण एशिया की राजनीति पर पड़ सकते हैं दूरगामी प्रभाव
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि बांग्लादेश वास्तव में इन परियोजनाओं को समाप्त करने का निर्णय लेता है तो इसका असर केवल द्विपक्षीय संबंधों तक सीमित नहीं रहेगा। दक्षिण एशिया में क्षेत्रीय कनेक्टिविटी, व्यापारिक गलियारों और रणनीतिक सहयोग की दिशा पर भी इसके प्रभाव देखने को मिल सकते हैं।
आने वाले दिनों में तारिक रहमान सरकार का अंतिम फैसला भारत-बांग्लादेश संबंधों की नई दिशा तय करने वाला महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।
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