ढाका/नई दिल्ली। जुलाई 2024 के छात्र विद्रोह और शेख हसीना के इस्तीफे के बाद बांग्लादेश अपने इतिहास के सबसे महत्वपूर्ण मोड़ पर खड़ा है। मंगलवार सुबह 13वें संसदीय चुनाव का शोर थम गया और अब सबकी नजरें 12 फरवरी 2026 को होने वाली वोटिंग पर हैं। इसे दुनिया का पहला ‘जेन-जी’ (Gen-Z) प्रेरित चुनाव कहा जा रहा है, जिसमें युवाओं की भूमिका निर्णायक होगी।
चुनाव का गणित: 300 सीटें और 2,000+ उम्मीदवार
बांग्लादेश चुनाव आयोग के अनुसार, इस बार का मुकाबला बेहद दिलचस्प है। संसद (जातीय संगसद) की 300 सीटों के लिए कुल 2,034 उम्मीदवार मैदान में हैं।
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प्रमुख दल: शेख हसीना की ‘अवामी लीग’ पर पाबंदी के कारण मुख्य मुकाबला बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) और जमात-ए-इस्लामी के नेतृत्व वाले गठबंधनों के बीच है।
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उम्मीदवारों की संख्या: BNP ने सबसे ज्यादा 291 उम्मीदवार उतारे हैं, जबकि जमात-ए-इस्लामी के 229 और जातीय पार्टी के 198 प्रत्याशी मैदान में हैं। 275 निर्दलीय उम्मीदवार भी अपनी किस्मत आजमा रहे हैं।
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शेरपुर-3 का पेंच: 300 में से केवल 299 सीटों पर ही 12 फरवरी को वोट डाले जाएंगे, क्योंकि शेरपुर-3 सीट पर एक उम्मीदवार की मृत्यु के कारण चुनाव स्थगित कर दिया गया है।
वोटर और युवा शक्ति: 12.77 करोड़ मतदाता तय करेंगे भविष्य
इस बार बांग्लादेश में मतदाताओं की संख्या रिकॉर्ड स्तर पर है।
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कुल वोटर: 12.77 करोड़ (लगभग 6.48 करोड़ पुरुष और 6.29 करोड़ महिलाएं)।
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युवाओं का दबदबा: कुल मतदाताओं में से 44% यानी करीब 5.60 करोड़ वोटर 18 से 37 साल की उम्र के हैं। 40 लाख से ज्यादा युवा पहली बार वोट डालेंगे।
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ट्रांसजेंडर वोटर: चुनाव में 1,220 ट्रांसजेंडर मतदाता भी अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे।
जनमत संग्रह: सिर्फ नेता नहीं, ‘जुलाई चार्टर’ पर भी लगेगी मुहर
संसदीय चुनाव के साथ ही इस बार एक ऐतिहासिक जनमत संग्रह (Referendum) भी हो रहा है। अंतरिम सरकार के प्रमुख मोहम्मद यूनुस ने ‘जुलाई राष्ट्रीय चार्टर-2025’ पेश किया है।
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क्या है चार्टर? इसमें प्रधानमंत्री के कार्यकाल की सीमा तय करना, राष्ट्रपति की शक्तियों को बढ़ाना और न्यायिक स्वतंत्रता जैसे सुधार शामिल हैं।
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वोटिंग का तरीका: मतदाताओं को चुनाव के लिए सफेद मतपत्र और जनमत संग्रह के लिए रंगीन मतपत्र दिए जाएंगे, जिसमें उन्हें ‘हां’ या ‘नहीं’ में जवाब देना होगा।
चुनावी अखाड़े के मुख्य खिलाड़ी
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BNP (धान की बालियां): तारिक रहमान (खालिदा जिया के बेटे) के नेतृत्व में पार्टी सत्ता में वापसी की कोशिश कर रही है। इनका मुख्य वादा भ्रष्टाचार मुक्त शासन और हाई-स्पीड रेल नेटवर्क है।
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जमात-ए-इस्लामी (तराजू): शफीकुर रहमान के नेतृत्व में यह पार्टी अब एक समावेशी छवि के साथ मैदान में है। इन्होंने ‘नेशनल सिटिजन पार्टी’ (NCP) के साथ गठबंधन किया है।
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नेशनल सिटिजन पार्टी (कमल का फूल): 2024 के छात्र आंदोलन के नायकों (नाहिद इस्लाम आदि) द्वारा गठित यह नई पार्टी युवाओं की पहली पसंद मानी जा रही है।
बड़े मुद्दे: भ्रष्टाचार, महंगाई और बुलेट ट्रेन
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भ्रष्टाचार: यह इस चुनाव का सबसे बड़ा मुद्दा है। सभी दलों ने इसे जड़ से खत्म करने का वादा किया है।
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महंगाई: जनवरी में 8.58% की मुद्रास्फीति दर के साथ बढ़ती कीमतें आम जनता के लिए बड़ी चिंता हैं।
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इंफ्रास्ट्रक्चर: रोचक बात यह है कि BNP और जमात दोनों ने ही ढाका को अन्य शहरों से जोड़ने के लिए ‘बुलेट ट्रेन’ का वादा किया है
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