Baku News: खालिस्तान समर्थक नेटवर्कों की गतिविधियों को लेकर एक नया भू-राजनीतिक समीकरण सामने आता दिखाई दे रहा है। सुरक्षा और खुफिया एजेंसियों से जुड़े सूत्रों के अनुसार, पाकिस्तान के करीबी सहयोगी अजरबैजान में अब कुछ खालिस्तान समर्थक समूह अपनी मौजूदगी मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं। भारत विरोधी गतिविधियों के लिए नए ठिकानों की तलाश कर रहे इन तत्वों पर भारतीय एजेंसियां लगातार नजर बनाए हुए हैं।
पश्चिमी देशों में बढ़ी सख्ती के बाद बदला रुख
पिछले कुछ वर्षों में कनाडा, ब्रिटेन और अमेरिका जैसे देशों में खालिस्तान समर्थक गतिविधियों को लेकर निगरानी और कानूनी कार्रवाई तेज हुई है। ऐसे माहौल में कई कट्टरपंथी तत्व नए ठिकानों की तलाश में जुटे हुए हैं। खुफिया सूत्रों का मानना है कि इसी वजह से अजरबैजान का नाम तेजी से चर्चा में आया है, जहां ये नेटवर्क अपेक्षाकृत कम निगरानी वाले माहौल का फायदा उठाने की कोशिश कर सकते हैं।
भारतीय एजेंसियों की नजर में नया केंद्र
सूत्रों के मुताबिक भारतीय सुरक्षा एजेंसियां अजरबैजान में विकसित हो रहे संभावित नेटवर्कों और उनके संपर्क सूत्रों पर विशेष निगरानी रख रही हैं। एजेंसियां यह भी आकलन कर रही हैं कि क्षेत्रीय स्तर पर बदलते भू-राजनीतिक समीकरणों का भारत विरोधी संगठनों पर क्या प्रभाव पड़ सकता है। अजरबैजान की रणनीतिक स्थिति और उसके अंतरराष्ट्रीय संपर्कों को भी जांच के दायरे में रखा गया है।
सम्मेलन के बाद बढ़ी चिंताएं
जानकारी के अनुसार, 16 जनवरी को अजरबैजान में “भारत में सिखों और अन्य राष्ट्रीय अल्पसंख्यकों के खिलाफ नस्लवाद और हिंसा” विषय पर एक सम्मेलन आयोजित किया गया था। इस कार्यक्रम में विदेशों में सक्रिय कई खालिस्तान समर्थक चेहरों की भागीदारी बताई गई थी। सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे आयोजनों के जरिए विभिन्न समूहों के बीच संपर्क बढ़ाने और नेटवर्क तैयार करने की कोशिशें की जा सकती हैं।
क्यों बढ़ रहा है अजरबैजान का महत्व?
विशेषज्ञों का कहना है कि अजरबैजान का बढ़ता महत्व कई कारणों से जुड़ा हुआ है। इसकी भौगोलिक स्थिति यूरोप और एशिया के बीच एक महत्वपूर्ण संपर्क बिंदु मानी जाती है। इसके अलावा अपेक्षाकृत आसान वीजा प्रक्रिया, क्षेत्रीय कूटनीतिक बदलाव और कुछ देशों के साथ बढ़ते संबंध इसे अंतरराष्ट्रीय नेटवर्कों के लिए आकर्षक बना सकते हैं।
पाकिस्तान और तुर्की कनेक्शन पर भी चर्चा
अजरबैजान के पाकिस्तान और तुर्की के साथ करीबी संबंधों को लेकर भी रणनीतिक हलकों में चर्चा हो रही है। हालांकि किसी प्रत्यक्ष साजिश या आधिकारिक समर्थन के ठोस सार्वजनिक प्रमाण सामने नहीं आए हैं, लेकिन सुरक्षा एजेंसियां इस पूरे घटनाक्रम को क्षेत्रीय सुरक्षा के नजरिए से गंभीरता से देख रही हैं। भारत के लिए यह मामला केवल एक देश तक सीमित नहीं बल्कि व्यापक भू-राजनीतिक गतिविधियों से जुड़ा माना जा रहा है।
भारत के सामने नई चुनौती?
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि खालिस्तान समर्थक समूह नए देशों में अपने नेटवर्क स्थापित करने में सफल होते हैं तो भारत के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सुरक्षा और कूटनीतिक चुनौतियां बढ़ सकती हैं। यही कारण है कि भारतीय एजेंसियां अजरबैजान में उभर रही गतिविधियों, वहां सक्रिय संगठनों और उनके अंतरराष्ट्रीय संपर्कों पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।
भारत विरोधी गतिविधियों के संभावित नए केंद्र के रूप में अजरबैजान का नाम सामने आने के बाद सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट मोड में हैं। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्षेत्रीय राजनीति और अंतरराष्ट्रीय संबंधों के बदलते समीकरण इस पूरे घटनाक्रम को किस दिशा में ले जाते हैं।
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