
नई दिल्ली, 17 अप्रैल 2026: संसद के विशेष सत्र का दूसरा दिन भी जबरदस्त राजनीतिक टकराव के संकेतों के साथ शुरू हुआ। महिला आरक्षण बिल और उससे जुड़े परिसीमन मुद्दे पर सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने हैं। पहले दिन आधी रात तक चले हंगामे के बाद शुक्रवार को भी सदन में तीखी बहस जारी है, जिसमें सरकार की मंशा पर गंभीर सवाल उठाए जा रहे हैं।
राज्यसभा में हरिवंश का फिर चयन, नेताओं ने दी बधाई
सत्र की शुरुआत में राज्यसभा के उपसभापति के रूप में हरिवंश नारायण सिंह का लगातार तीसरी बार चयन किया गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे सहित कई नेताओं ने उन्हें शुभकामनाएं दीं। इसके बाद सदन का ध्यान सीधे महिला आरक्षण और परिसीमन जैसे संवेदनशील मुद्दों पर केंद्रित हो गया।
महिला आरक्षण बनाम परिसीमन: असली विवाद क्या है?
महिला आरक्षण बिल को लेकर सरकार का दावा है कि यह महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी बढ़ाने की दिशा में ऐतिहासिक कदम है। लेकिन विपक्ष का आरोप है कि इस बिल की आड़ में परिसीमन को लागू करने की रणनीति बनाई जा रही है। विपक्षी सांसदों का कहना है कि वे महिला आरक्षण के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन इसे परिसीमन से अलग रखा जाना चाहिए।
“चुनावी नक्शा बदलने की कोशिश”: राहुल गांधी का हमला
लोकसभा में चर्चा के दौरान विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यह बिल सिर्फ महिला सशक्तिकरण का मुद्दा नहीं है, बल्कि इसके जरिए देश के चुनावी नक्शे को बदलने की कोशिश की जा रही है। राहुल गांधी ने इसे “राष्ट्रविरोधी सोच” से जुड़ा कदम बताते हुए सरकार की नीयत पर सवाल उठाए।
अपने संबोधन के दौरान उन्होंने कहा कि महिलाओं की भूमिका देश के सामाजिक और राजनीतिक ढांचे में केंद्रीय है। उन्होंने अपनी बहन प्रियंका गांधी का जिक्र करते हुए कहा कि “उन्होंने पांच मिनट में वह कर दिखाया जो मैं 20 साल में नहीं कर पाया,” जिससे सदन में हल्की मुस्कान भी देखने को मिली।
स्पीकर के सवाल पर राहुल गांधी का जवाब
राहुल गांधी जब बोलने के लिए खड़े हुए तो स्पीकर ने उनके हाथ में चोट को लेकर सवाल किया। इस पर उन्होंने बताया कि उनके अंगूठे में चोट लगी है। इसके बाद उन्होंने अपने भाषण की शुरुआत की और सरकार के खिलाफ अपनी बात मजबूती से रखी।
वोटिंग से पहले बढ़ी हलचल
महिला आरक्षण बिल पर वोटिंग से पहले कांग्रेस सांसदों के साथ स्पीकर की अहम बैठक भी हुई। इससे साफ है कि सरकार और विपक्ष दोनों ही इस मुद्दे पर रणनीति बनाने में जुटे हैं। आने वाले समय में इस बिल पर निर्णायक वोटिंग से पहले और ज्यादा राजनीतिक घमासान देखने को मिल सकता है।
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