बंगाल में उफनता गुस्सा: मालदा में SIR अफसरों को बनाया बंधक, 9 घंटे ठप रहा नेशनल हाईवे

मालदा में बवाल, प्रशासन पर भारी पड़ा जनता का आक्रोश
पश्चिम बंगाल के मालदा जिले में उस वक्त हालात बेकाबू हो गए जब मतदाता सूची से जुड़े विवाद को लेकर स्थानीय लोगों का गुस्सा सड़कों पर फूट पड़ा। SIR (Special Intensive Revision) प्रक्रिया के विरोध में उग्र भीड़ ने सरकारी अफसरों को घेर लिया और उन्हें घंटों तक बंधक बनाए रखा। इस दौरान इलाके का मुख्य नेशनल हाईवे पूरी तरह जाम हो गया, जिससे यातायात करीब 9 घंटे तक बाधित रहा।


मतदाता सूची विवाद बना टकराव की जड़
जानकारी के मुताबिक, SIR अभियान के तहत मतदाता सूची के पुनरीक्षण का काम चल रहा था। इसी दौरान कई लोगों ने आरोप लगाया कि उनके नाम सूची से हटाए जा रहे हैं या गलत तरीके से बदलाव किया जा रहा है। इसको लेकर स्थानीय निवासियों में भारी नाराजगी देखी गई।

गुस्साई भीड़ ने मौके पर पहुंचे अधिकारियों को घेर लिया और जवाब मांगने लगी। देखते ही देखते प्रदर्शन उग्र हो गया और हालात नियंत्रण से बाहर चले गए।


नेशनल हाईवे जाम, यात्रियों को भारी परेशानी
प्रदर्शनकारियों ने विरोध के तौर पर नेशनल हाईवे को पूरी तरह जाम कर दिया। सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। एंबुलेंस, स्कूल बस और जरूरी सेवाओं से जुड़े वाहन भी इस जाम में फंस गए, जिससे आम लोगों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा।

करीब 9 घंटे तक हाईवे ठप रहने के बाद प्रशासन और पुलिस की समझाइश के बाद धीरे-धीरे स्थिति सामान्य हो सकी।


अफसरों को बंधक बनाने से बढ़ी चिंता
इस घटना में SIR से जुड़े अधिकारियों को घंटों तक बंधक बनाए रखना प्रशासन के लिए गंभीर चिंता का विषय बन गया है। अधिकारियों को सुरक्षित निकालने के लिए पुलिस को कड़ी मशक्कत करनी पड़ी।

बताया जा रहा है कि हालात को नियंत्रित करने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया और वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे।


सुप्रीम कोर्ट की फटकार के बीच बढ़ा सियासी तापमान
इस पूरे मामले ने राज्य की राजनीति को भी गरमा दिया है। पहले से ही मतदाता सूची को लेकर चल रही बहस और सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियों के बीच यह घटना और अधिक संवेदनशील बन गई है। विपक्ष ने सरकार पर निशाना साधते हुए चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता पर सवाल उठाए हैं।


प्रशासन की अपील—शांति बनाए रखें
प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और किसी भी शिकायत के लिए तय प्रक्रिया का पालन करें। अधिकारियों का कहना है कि मतदाता सूची का काम पूरी पारदर्शिता के साथ किया जा रहा है और किसी के साथ अन्याय नहीं होगा।

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